पटना : राज्य के लोकायुक्त के निर्देश पर मुखिया, सरपंच, प्रमुख व जिला पर्षद अध्यक्ष सहित सभी त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रतिनिधियों की चल -अचल संपत्ति को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया है.
पंचायती राज विभाग ने 31 दिसंबर की कट ऑफ डेट मानते हुए राज्य के करीब ढ़ाई लाख जनप्रतिनिधियों को अपनी चल- अचल संपत्ति सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. राज्य की हर पंचायत में औसतन साल में एक करोड़ की राशि विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए दी जाती है. राज्य में 8386 ग्राम पंचायतें हैं, जबकि 2019-20 में 14 वें वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग की ओर से कुल 8651.82 करोड़ राशि जारी की गयी है. गांवों के विकास पर खर्च की जानेवाली राशि में पारदर्शी व्यवस्था लाने यह आवश्यक हो गया था कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति को सार्वजनिक किया जाये.
इधर, लोकायुक्त ने पंचायती राज प्रतिनिधियों की संपत्ति को सार्वजनिक करने के आदेश से इस पर अंकुश लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है. त्रिस्तरीय पंचायत स्तर पर 8386 मुखिया, 8386 सरपंच, एक लाख 14 हजार 733 पंचायत सदस्य, एक लाख 14 हजार ग्राम कचहरी पंच, 11497 पंचायत समिति सदस्य, 534 प्रखंड प्रमुख, 1161 जिला पर्षद सदस्य और 38 जिला पर्षद अध्यक्षों का निर्वाचन होता है.
पंचायती राज के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बताया कि लोकायुक्त के आदेश के बाद त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की संपत्ति को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है. इससे पंचायतों में विकास कार्य होगा साथ ही भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा.
