अनुज शर्मा
मामला पुलिस भवन निर्माण निगम का
पटना : बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम में फर्जी बैंक गारंटी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर टेंडर के खेल का खुलासा हुआ है. जाली बैंक गारंटी के दस्तावेज दिखा कर ठेका लेने वाला एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है. पीडब्लूडी कोड की अवहेलना कर एक ही ठेकेदार को टेबुल टेंडर देने की भी बात सामने आयी है. मुख्य सचिव, डीजीपी, वित्त और पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिवों से इसकी शिकायतें हो चुकी हैं.
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड एक ठेकेदार और एक इंजीनियर को बताया जा रहा है. इस पूरे मामले की जांच निगम के स्तर पर ही हो रही है. इस मामले को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे निगम के वित्तीय सलाहकार और मुख्य लेखा पदाधिकारी हेमंत कुमार ने कहा कि जाली बैंक गारंटी पाये जाने पर तीन टेंडर निरस्त कर ठेकेदारों पर कार्रवाई की गयी है.
नकली बैंक गारंटी का बड़ा खेल :
जानकार बताते हैं, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का सालाना बजट करीब 300 करोड़ रुपये का है. हर साल मरम्मत और नवनिर्माण के 500 से अधिक टेंडर जारी होते हैं. 1000 से अधिक ठेकेदार पंजीकृत हैं. ठेका लेने से पहले ठेकेदार को टेंडर की दो फीसदी रकम के कागजात बैंक गारंटी के रूप में जमा कराने होते हैं.
फर्जी बैंक गारंटी का खेल यहीं से शुरू होता है. वे बैंक गारंटी के जाली दस्तावेज लगाकर टेंडर डालते हैं. जब उनका टेंडर निकल आता है, तो वह काम शुरू करने से पहले साइट पर मैटेरियल दर्शा कर निगम से एडवांस रकम लेते हैं. यह रकम मैटेरियल के मूल्य की 75 फीसदी तक होती है. सूत्रों का दावा है कि इसी मैटेरियल एडवांस से फिर असली बैंक गारंटी बनायी जाती है. इसके बाद नये दस्तावेज को जाली कागजात से बदल दिया जाता है. कोई इसकी शिकायत करता है तो उस काम को रद्द कर उस ठेकेदार का किसी और नाम पर निबंधन कर दिया जाता है.
मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रधान सचिव के पास पहुंची शिकायत
ये निर्माण आये जांच के दायरे में
जाली बैंक गारंटी जमा कर टेंडर लिये जाने के मामले में बीएमपी नौ और 13 के प्रशासनिक भवन, चार सौ सिपाही क्षमता वाले का क्लासरूम, एक हजार सिपाही के बैरक, हाजीपुर में होमगार्ड के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान और पटना में निगम द्वारा बनाये गये कई भवनों के बारे में शिकायतें मिली हैं.
सिंडिकेट को मिल रहा सपोर्ट
निगम में भले ही एक हजार ठेकेदार पंजीकृत हैं, लेकिन गिने-चुके ठेकेदारों की तूती बोलती है. जाली बैंक गारंटी, जाली दस्तावेज और फर्जी एनएससी को लेकर एक ठेकेदार पर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता ने सीएमडी से सिफारिश की थी. लेकिन, बात किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है. जानकारों का कहना है कि इस सिंडिकेट को उनलोगों का भी सपोर्ट है, जिन पर नियम-कायदे से तमाम प्रक्रियाओं को पूरा कराने की जवाबदेही है.
