बेहाल बाजार : बोहनी पर आफत, हर दिन सात करोड़ का नुकसान

पटना : प्रदर्शन के कारण मौर्यालोक परिसर में छह दिनों से कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है. कारोबारियों को हर दिन सात करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है. कई दुकानों में पिछले तीन-चार दिन से बोहनी तक नहीं हुई है. ग्राहकों के इंतजार में दुकानदार टकटकी लगाये बैठे रहते हैं. मौर्यालोक परिसर […]

पटना : प्रदर्शन के कारण मौर्यालोक परिसर में छह दिनों से कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है. कारोबारियों को हर दिन सात करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है.
कई दुकानों में पिछले तीन-चार दिन से बोहनी तक नहीं हुई है. ग्राहकों के इंतजार में दुकानदार टकटकी लगाये बैठे रहते हैं. मौर्यालोक परिसर में लगभग 350 से अधिक दुकानें है. सबसे अधिक असर मौर्यालोक टावर और सी ब्लाॅक के दुकानदारों पर पड़ा है. प्रदर्शनकारियों के भय से कई दुकानों का शटर गिरा हुआ है.
दुकानदारों की मानें, तो प्रदर्शन की खबरों से भी ग्राहक चाह कर भी नहीं आ रहे हैं. प्रशासन को तत्काल कोई ठोस कदम उठाना चाहिए. सरकार भी राजस्व की हानि हो रही है. प्रभात खबर ने सफाईकर्मियों के प्रदर्शन से हो रहे नुकसान और परेशानियों को ले इस संबंध में दुकानदारों से उनके दर्द को जानने का प्रयास किया.
छह दिनों से नहीं उठे हैं कई दुकानों के शटर
प्रदर्शन के कारण ग्राहक
इस मार्केट में नहीं आ रहे है. पिछले तीन दिनों से बोहनी तक नहीं हुई. सुबह से देर शाम तक ग्राहक पहुंचने के इंतजार में बैठे रहने को मजबूर हैं. सरकार और सफाईकर्मियों के बीच दुकानदार पिस रहे हैं. मंदी के दौर से अभी उबर भी नहीं पाये थे कि नयी आफत आ गयी है.
अशोक त्रिवेदी
प्रदर्शन के कारण पिछले छह दिनों सेग्राहक कम नजर आ रहे हैं. मुश्किल से देर शाम तक बोहनी हो पा रही है. हजार-दो हजार रुपये की ही दुकानदारी हो पा रही है. हर दिन का खर्च कम-से-कम तीन से चार हजार रुपये है. प्रदर्शन को लेकर दुकानदारों में काफी आक्रोश हैं. सरकार को ध्यान देना चाहिए.
सिद्धार्थ जैन
सफाईकर्मियों के प्रदर्शन के कारण कारोबार पूरी तरह ठहर-सा गया है. खासकर मौर्या टावर और सी ब्लॉक के दुकानदार प्रभावित हैं. यहां की कई दुकानों के शटर पिछले छह दिनों से नहीं उठे हैं. जो दुकानें खुल भी हैं, तो प्रदर्शनकारियों की भीड़ से ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं.
अभिमन्यु कुमार
लगन होने के बावजूद दुकान में सन्नाटा है. दिन में तो ग्राहक न के बारबार पहुंच रहे हैं. भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द सफाईकर्मियों को हड़ताल समाप्त हो. प्रदर्शनकारी अपने हक की लड़ाई लड़ें, लेकिन धरना स्थल पर जाकर. अपने हक के लिए दूसरे के पेट पर क्यों लात मार रहे हैं.
रोहित कुमार

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