पटना : मोतिहारी स्थित स्टेट बैंक की करेंसी चेस्ट में हुए करोड़ों के घोटाले में अब रिजर्व बैंक के अधिकारी भी निशाने पर आ गये हैं. ज्ञात हो कि यह मामला 2016 से लेकर 2019 के बीच का हैं. रिजर्व बैंक के प्रावधान के अनुसार प्रति छह माह में करेंसी चेस्ट की नियमित जांच अनिवार्य है. लेकिन, रिजर्व बैंक के निरीक्षी अधिकारियों की ओर से सतही तौर पर निरीक्षण की महज खानापूर्ति की गयी. इस कारण बैंक कर्मचारी व अधिकारियों का मनोबल बढ़ता गया है. अगर समय रहते गंभीरता से जांच की जाती, तो इतने बड़े रकम की गड़बड़ी सामने नहीं आती.
इस संबंध ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव डीएन त्रिवेदी ने सोमवार को कहा कि मोतिहारी स्टेट बैंक करेंसी चेस्ट में जो गड़बड़ी उजागर हुई है. उसे स्टेट बैंक के अधिकारियों के साथ रिजर्व बैंक का भी उत्तरदायित्व बनता है. उन्होंने कहा कि अगर समय-समय पर निरीक्षण होती, तो इस पर रोक लगायी जा सकती थी. त्रिवेदी ने कहा इस मामले में वित्त मंत्रालय को रिजर्व बैंक की भूमिका की भी जांच सीबीआइ से करना चाहिए. हो सकता है कि इस तरह की गड़बड़ी अन्य बैंकों के करेंसी चेस्ट में भी संगठित रूप से हो रहा हो.
नोटों की गिनती जारी
इस बीच नोटों की गिनती का काम जारी रहा है. मिली जानकारी के अनुसार नोटों की हालात को देखते हुए नोटों की गिनती मैनुअल हो रहा है. इसके लिए तीन दर्जन से अधिक अधिक कर्मचारी व अधिकारी को तैनात किया गया है.
नोटों मिलने में कर्मचारियों का काफी माथा-पेची करना पड़ रहा है. अब तक बड़ी संख्या में ऐसे नोट मिले है, जिसका कई टुकड़ा मिल ही नहीं रहा है. इस मामले में जानकारी के लिए अधिकारियों से संपर्क किया गया. लेकिन, किसी न कुछ भी बताने से साफ इन्कार कर दिया.
