पटना : जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में जदयू बड़ी पार्टी है. विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ेगी, लेकिन लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी सीटों का बंटवारा नहीं होगा.
सीटों का बंटवारा पहले के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ जैसे होता रहा है, उसी तरह होगा. इस बार इसका फॉर्मूला 1.4:1 या इसके आसपास होगा. यह 1:1 के आधार पर नहीं होगा. यानी यदि जदयू 14 सीटों पर चुनाव लड़ेगा तो भाजपा को 10 सीटें मिल सकती हैं. यह अनुपात लोजपा के लिए नहीं है. ये बातें उन्होंने रविवार को एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू के दौरान कहीं.
प्रशांत किशोर ने कहा कि 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू ने 141 और भाजपा ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा की जीती हुई सीटों का अनुपात भी करीब 1.4:1 का रहा था. उन्होंने कहा कि एक बात साफ है कि दोनों पार्टियों का बराबर सीटों पर लड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं उठता. हमारे पास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का चेहरा है. प्रशांत किशोर ने कहा कि पार्टी जो भूमिका तय करेगी, वह काम करेंगे.
पिछली दफा पार्टी ने यूनिवर्सिटी में चुनाव लड़वाने की जिम्मेदारी दी थी. झारखंड में भी चुनाव हुआ लेकिन वहां कोई जिम्मेदारी नहीं मिली. वहां पार्टी का कोई बड़ा आधार भी नहीं है. कहीं पर सिर्फ चुनाव लड़ लेने और पोस्टर चिपका देने से जीत नहीं मिल जाती है. कहीं भी जीत के लिए कम से कम चार से पांच साल मेहनत करनी पड़ती है.
जनता को भविष्य की योजना बताना जरूरी
पिछले दिनों जदयू द्वारा लालू के 15 साल बनाम नीतीश के 15 साल पर लगाये गये पोस्टर पर उन्होंने कहा कि इसकी चर्चा होगी. हमें यह बताना चाहिए कि आने वाले पांच या 10 साल में हम क्या करेंगे. चुनाव सिर्फ बीती हुई बातों पर नहीं लड़ा जाता और नारों से जीत-हार तय नहीं होती है. जनता भविष्य देखना चाहती है. नीतीश कुमार कह चुके हैं कि अगले पांच साल वह सात निश्चय योजना के तहत काम करेंगे.
किसी भी हाल में नहीं लागू हो एनआरसी
एनआरसी पर प्रशांत किशोर ने कहा कि देश में यह किसी भी हाल में नहीं लागू होना चाहिए. भूमिहीन और गरीब तबके के ऐसे कई लोग हैं जिनके पास कोई कागजात नहीं हैं जो सरकार द्वारा नागरिकता के बताये मानकों को पूरा करती हो. एनआरसी गैरजरूरी है. सरकार को शरणार्थियों और घुसपैठियों के लिए कोई अच्छा तरीका निकालना चाहिए लेकिन 130 करोड़ों लोगों को लाइन में खड़ा करके उनकी नागरिकता नहीं पूछ सकते.
