भाजपा-जदयू में सीट बंटवारे के बाद ही उम्मीदवारों के नाम होंगे तय
पटना : नया वर्ष 2020 राजनैतिक दृष्टिकोण से भी खासकर एनडीए के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा. विधानसभा चुनाव के पहले अप्रैल-मई में राज्यसभा की पांच और राज्य विधान परिषद की 29 सीटों पर भी चुनाव होने वाले हैं. इन दोनों चुनावों में भाजपा की सीटें घटेंगी. हालांकि, भाजपा के प्रदेश स्तरीय आला अधिकारी कह रहे हैं कि सब ठीक होगा. जदयू-भाजपा के मुखिया मिलकर आराम से तय कर लेंगे.
किसे जाना है, किसे रोकना है और किस नये चेहरे को मौका मिलेगा, तो यह पार्टी हाइकमान के स्तर पर पार्लियामेंटरी बोर्ड तय करेगा. वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा की दो सीटें डॉ सीपी ठाकुर और आरके सिन्हा की खाली हो रही हैं, जिनमें एक सीट ही भाजपा के खाते में आयेगी. अब इन दोनों मौजूदा सांसदों में किसी एक या दोनों को संगठन में कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है और किसी नये चेहरे को भी मौका मिल सकता है.
2020 के मध्य में राज्यसभा और विधान परिषद की खाली होने वाली सीटों पर समीकरण की तालमेल की कवायद में जदयू और भाजपा
पेचीदा होगा सीटों का बंटवारा
वहीं, बिहार विधान परिषद में 29 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें अभी भाजपा के पांच विधान पार्षद काबिज हैं. इनमें 12 सीटें राज्यपाल के स्तर से मनोनीत होने वाले कोटे की हैं. इन सभी पर वर्तमान में जदयू का कब्जा है. इनमें आधी या इसके आसपास सीटें इस बार भाजपा को मिलने की संभावना है. इसके अलावा विधायकों के माध्यम से चुनी जाने वाली विधानसभा कोटे की नौ सीटें तथा आठ सीटें स्नातक एवं शिक्षक कोटे से निर्वाचित होने वाली हैं, जो खाली होने जा रही हैं.
मौजूदा समय में नौ सीटों के कोटे में तीन सीटों पर भाजपा के एमएलसी हैं, जिनमें संजय मयूख, कृष्ण कुमार सिंह और राधा मोहन शर्मा शामिल हैं, जबकि शिक्षक कोटे में भाजपा के एक एमएलसी प्रो नवल किशोर यादव तथा स्नातक कोटे से एनके यादव हैं. इनमें कुछ सीटें कम भी हो सकती हैं. पार्टी के अंदर इन पांच एमएलसी में कुछ के बदले नये चेहरे को उतारने की, तो कुछ को किसी दूसरी जगह पर सेट करने की चर्चा भी तेजी से चल रही है.
चार सीटें राजद व कांग्रेस के कोटे में जायेंगी
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर विधायक कोटे से चुने जाने वाली नौ सीटों में चार सीटें राजद और कांग्रेस कोटे में जायेगी. शेष पांच सीटों में जदयू की भी हिस्सेदारी होगी. , भाजपा को दो मिलेंगी या तीन सीटें, इसमें अभी पेच है. इस तरह से भाजपा और जदयू के बीच सीटों के बंटवारे के बाद ही उम्मीदवारों के फाइनल होने की संभावना है.
