राज्य के बुजुर्गों में बढ़ रही डिमेंसिया की बीमारी

पटना : राज्य के बुजुर्गों में डिमेंसिया की बीमारी बढ़ रही है. कभी 75 साल की उम्र में होने वाली भूलने की यह बीमारी अब 65 साल की उम्र में हो रही है. इस बीमारी के कारण राज्य के तीन से पांच फीसदी बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं. वहीं, 65 से 75 साल के 10 […]

पटना : राज्य के बुजुर्गों में डिमेंसिया की बीमारी बढ़ रही है. कभी 75 साल की उम्र में होने वाली भूलने की यह बीमारी अब 65 साल की उम्र में हो रही है. इस बीमारी के कारण राज्य के तीन से पांच फीसदी बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं. वहीं, 65 से 75 साल के 10 फीसदी बुजुर्ग इससे जूझ रहे हैं. 75 से 80 उम्र के 20 फीसदी बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं.

यह अध्ययन इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी आइजीआइएमएस के न्यूरोलॉजी विभाग का है. अपने अध्ययन में अस्पताल ने कहा है कि अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंसिया के साथ ही रिवर्सिबल डिमेंसिया के मामले बढ़ रहे है. यानि बुजुर्गों में भूलने की बीमारी अब गंभीर होने की स्थिति में आ चुकी है. इसका कारण है यह कि बुजुर्गाें में तनाव बढ़ रहा है और वे अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं.
75 साल के 10% बुजुर्ग हो रहे हैं प्रभावित
65 की उम्र में हो रही है बीमारी
डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति दैनिक कार्य ठीक से नहीं कर पाते
आइजीआइएमएस के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ अशोक कुमार कहते हैं कि डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति अपने दैनिक कार्य ठीक से नहीं कर पाते. इन व्यक्तियों की याददाश्त कमजोर हो जाती है. उन्हें आम तौर के रोजमर्रा के हिसाब में दिक्कत हो सकती है और वे सामान्य काम करने में भी कठिनाई महसूस कर सकते हैं.
कभी कभी वे यह भी भूल सकते हैं कि वे किस शहर में हैं, या कौन सा साल या महीना चल रहा है. बोलते हुए उन्हें सही शब्द नहीं सूझता. उनका व्यवहार बदला बदला सा लगने लगता है और व्यक्तित्व में भी फर्क आ सकता है.
ऐसी हालत में क्या करें बुजुर्ग?
मस्तिष्क में अधिकांश परिवर्तन डिमेंशिया का कारण बनता है. यदि व्यक्ति को डिप्रेशन, दवा के दुष्प्रभाव, थायराइड, विटामिन की कमी आदि जैसी स्थितियों का पता चलता है तो इसका समय पर इलाज कराया जाना चाहिए. इसके लिए न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में इलाज के लिए संपर्क करें.

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