याचिका दायर करने के क्रम में स्टांप रिपोर्टिंग में गड़बड़ी की जांच सीबीआइ को सौंपने संबंधी मामला
पटना : पटना हाइकोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार के 24 अक्तूबर को दिये आदेश के खिलाफ हाइ कोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति के अध्यक्ष की ओर से एक रिट याचिका मंगलवार को दायर की गयी है.
जस्टिस राकेश कुमार ने हाइकोर्ट में मुकदमा दायर करने के क्रम में रजिस्ट्री और स्टांप रिपोर्टिंग में गड़बड़ी मानते हुए इसकी जांच सीबीआइ को सौंपी है. इसी संबंध में हाइकोर्ट को रुख स्पष्ट करने के लिए दायर हुई याचिका पर समन्वय समिति के अध्यक्ष ने जल्द सुनवाई करने के लिए अनुरोध किया. मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई तुरंत करने की बात कही. लेकिन, अधिवक्ताओं के विरोध को देखते हुए मंगलवार को इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी. अब सुनवाई किस दिन की जायेगी, यह मुख्य न्यायाधीश ही निर्धारित करेंगे.
दो खेमों में बंटे वकील
दरअसल, जस्टिस राकेश कुमार के उस आदेश पर वकील दो खेमे में बंट गये हैं. वकीलों का एक पक्ष उस आदेश को रद्द करने की बात कर रहा है. दूसरा पक्ष उस आदेश को सही कहते हुए उसमे किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप नही करने की बात कर रहा.
रजिस्ट्री के कार्यकलापों से पीड़ित अधिवक्ताओं का कहना है इसके कारण दायर मुकदमों की स्टांप रिपोर्टिंग में काफी समय लग जाता है. रजिस्ट्री में कार्यरत कर्मियों और अधिकारियों तक पहुंच वाले अधिवक्ताओं के मुकदमों की स्टांप रिपोर्टिंग जहां एक दिन में कर दी जाती है. वहीं, जिस अधिवक्ता की पहुंच नहीं है उनके मामले में स्टांप रिपोर्टिंग में महीनों लग जाते हैं. यह भेदभाव हाइ कोर्ट की रजिस्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है. जस्टिस राकेश कुमार ने इसी सब मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआइ को सौंपा है. दूसरे पक्ष का कहना है की यह हाइ कोर्ट काअंदरूनी मामला है. इस मामले के लिए हाइकोर्ट में बनी निगरानी द्वारा इसकी जांच होनी चाहिये.
