के साथ की मारपीट, हथकड़ी भी ले गये अपने साथ, पकड़ने के लिए छापेमारी
पटना : पटना सिविल कोर्ट से सटे पुराने सिविल सर्जन कार्यालय परिसर से बुधवार को तीन कैदियों ने सुरक्षा में तैनात सिपाही मोतीचंद चौधरी के साथ मारपीट की और हथकड़ी लेकर गंगा नदी की ओर फरार हो गये. इस दौरान कैदियों व सिपाही के बीच जम कर उठा-पटक भी हुई. सिपाही मोतीचंद चौधरी ने एक को फिर से पकड़ लिया था, लेकिन तीनों ने मिल कर पिटाई कर दी. भागने वाले कैदियों में मो इमरान उर्फ बादशाह (बाकरगंज), रोहित कुमार (कदमकुआं) व शहाबुद्दीन उर्फ भोला (फुलवारीशरीफ) शामिल हैं. इन तीनों को फुलवारीशरीफ जेल से पेशी के लिए लाया गया था.
इधर, घटना की जानकारी मिलने पर सिटी एसपी मध्य विनय कुमार तिवारी दल-बल के साथ पहुंचे और मामले की जांच करने के साथ ही छापेमारी की. हालांकि तीनों कैदी नहीं पकड़े गये हैं और न ही हथकड़ी बरामद की जा सकी है. कोर्ट हाजत के प्रभारी के बयान के आधार पर पीरबहोर थाने में तीनों कैदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी गरिमा मलिक ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट टाउन डीएसपी सुरेश कुमार को सौंपी है. उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी.
तीनों कैदियों ने पेशाब करने का किया था बहाना
सूत्रों के अनुसार एक कैदी के हाथ में हथकड़ी थी और दो अन्य कैदियों के कमर में रस्सा बांधा हुआ था. पेशी के दौरान जाने के क्रम में तीनों कैदियों ने पेशाब करने का बहाना बना दिया और पुराने सिविल सर्जन कार्यालय की ओर जाने का आग्रह किया.
बतायी गयी जगह पर सन्नाटा देख कर कैदियों ने सिपाही के हाथ में रस्सा के छोर को छीन लिया. सिपाही ने जब विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की. इसके बाद दो कैदियों ने अपने कमर से रस्सा को खोल लिया और निकल भागे. चूंकि एक कैदी के हाथ में हथकड़ी थी, तो उसे साथ में लेकर निकल भागा. इसके बाद भी सिपाही ने खदेड़ कर एक को पकड़ लिया. इसके बाद तीनों ने फिर से सिपाही की पिटाई कर दी और वहां से गंगा नदी की ओर फरार हो गये. सिपाही दौड़ कर सिविल कोर्ट गेट पर पहुंचा और वहां तैनात पुलिसकर्मियों को मामले की जानकारी दी.
बाइक चोरी में बंद थे जेल में : बताया जाता है कि दो कैदी मो इमरान उर्फ बादशाह व रोहित कुमार को पीरबहोर पुलिस ने बाइक चोरी के आरोप में जेल भेजा गया था, जबकि शहाबुद्दीन उर्फ भोला को फुलवारीशरीफ पुलिस ने बाइक चोरी के आरोप में जेल भेजा था. तीनों के ऊपर बाइक चाेरी का आरोप था.
सिविल सर्जन कार्यालय जाने का क्या था मकसद: सवाल है कि जवान तीनों को सिविल सर्जन कार्यालय क्यों ले गया? जबकि उस जगह पर न्यायालय का कोई काम नहीं होता है. कोर्ट का हाजत पीरबहोर थाने की ओर है, जबकि पुराना सिविल सर्जन कार्यालय सिविल कोर्ट के पश्चिम स्थित मेन गेट से सटा है.
मात्र एक जवान के सहारे थे तीन कैदी
फुलवारीशरीफ जेल से तीनों कैदियों को वैन में पटना सिविल कोर्ट लाया गया था, जहां उन्हें कोर्ट हाजत में रख दिया गया था. इसके बाद उन तीनों को एक साथ न्यायालय में पेशी के कराने के लिए मात्र एक जवान लेकर निकला था. एक जवान के भरोसे तीन कैदियों को पेशी के लिए भेजना लापरवाही थी.
