पटना : स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य के 450 अस्पतालों को जैविक कचरा निबटाने का निर्देश दिया गया है. इन सभी अस्पतालों को एनजीटी के आदेशों के पालन का निर्देश दिया गया है.
इन अस्पतालों को दिये गये निर्देश में 31 अक्तूबर तक जैविक कचरे के निष्पादन का पालन नहीं करनेवाले संस्थानों पर कार्रवाई हो सकती है. राज्य में प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा 111 अस्पतालों पर केस दायर कर 27 अस्पतालों को बंद करने का जनवरी 2019 में दिया गया था. साथ ही राज्य के 24 जिलों के 1030 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया था. इसके अलावा राज्य के 23 पैथोलॉजिकल जांच व 102 स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों को भी क्लोजर डायरेक्शन का नोटिस जारी किया है.
आठ निजी नर्सिंग होम को सुधार का आदेश : पर्षद द्वारा मई के अंत में राजधानी के 14 प्रमुख अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम को नोटिस जारी करते हुए कहा गया था कि क्यों नहीं इन अस्पतालों को बंद करा दिया जाये. साथ आठ निजी नर्सिंग होम को आवश्यक सुधार का आदेश दिया गया है.
सरकार के प्रयासों के बाद भी अभी राज्य के 450 ऐसे अस्पताल हैं, जो जैविक कचरे का निस्तारण नहीं कर रहे हैं. राज्य के सभी अस्पतालों को प्रतिदिन निकलने वाले जैविक कचरे का प्रबंधन करना है.
इसके लिए संस्थानों में इनसिनिरेटर की व्यवस्था करनी है. अस्पतालों से निकलने वाले सूखे कचरे जिसमें, सुई, सिरिंज, रूई, बैंडेज व पट्टी जैसी सामग्री शामिल हैं. इससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य का खतरा हो सकता है.
