पटना : सीबीएसइ के सभी स्कूलों में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू होगी. इसके लिए योजना तैयार हो रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई आठवीं क्लास से ही अनिवार्य होगी. सीबीएसइ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सिलेबस इंटेल की मदद से तैयार करवाया है. बोर्ड ने कहा है कि अभी वर्तमान सत्र में 2019-20 से नौवीं कक्षा से ही वैकल्पिक विषय के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शुरू किया गया है.
लेकिन, आगे आने वाले सत्र में यह कोर्स आठवीं कक्षा से ही शुरू हो जायेगी. बोर्ड ने कहा है कि अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई व्यवस्थित सिलेबस नहीं है. सीबीएसइ दुनिया का पहला बोर्ड होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई होगी. बोर्ड ने कहा है कि स्कूल प्रेरक पहल के तहत आठवीं कक्षा से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू कर सकता है. यह शुरुआत में 12 घंटे की अवधि का कोर्स होगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की 168 कक्षाएं चलेगी : इस कोर्स के लिए बोर्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन करेगा. आठवीं में 12 घंटे व नौवीं में 112 घंटे की पढ़ाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की होगी. 112 घंटे को 168 कक्षाओं में बांटा जायेगा. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का परिचय 12 घंटे का है. एआइ प्रोजेक्ट चक्र 26 घंटे, न्यूरल नेटवर्क 4 घंटे तथा पाइथन का परिचय विषय 70 घंटे का है. बोर्ड ने इसके साथ ही पांच-छह स्कूलों को मिला कर कलस्टर तैयार करने की पहल की है, जिसके जरिये वे आपस में एक दूसरे से अच्छी चीजों को साझा कर सकते हैं और एक दूसरे से सीख सकते हैं. बोर्ड ने शिक्षा को बेहतर, सहज व सुलभ बनाने के लिए 10 मार्गदर्शिका तैयार की है. इसमें एक प्रमुख मार्गदर्शिका स्कूल गुणवत्ता मैनुअल शामिल है. जिसके आधार पर स्कूल अपना मूल्यांकन कर सकते हैं.
10वीं तक कला को प्रैक्टिकल रूप में पढ़ाने की अनिवार्यता
सीबीएसइ ने कहा है कि कक्षा एक से 10 तक के स्कूलों में सह शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में कला शिक्षा जरूरी होगी. सीबीएसइ ‘कला समेकित शिक्षा प्रायोगिक ज्ञान की ओर पहल’ के तहत कक्षा एक से 10 तक कला शिक्षा को अनिवार्य बनाया है. इससे बच्चों में कला अाधारित जिज्ञासा, जांच व अन्वेषण, महत्वपूर्ण सोच और रचनात्मकता में मदद मिलेगी.
सीबीएसइ के कला प्रवेशिका दिशा निर्देशिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 के उद्देश्यों को पूर्णत: प्राप्त करने के लिए कला एकीकरण अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है. इस पहल के तहत बोर्ड की ओर से जारी हस्त पुस्तिका में यह बताया गया है कि कला, पाठ्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में जारी रहेगी. एक सह शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में कक्षा एक से 10 के लिए यह अनिवार्य होगी.
स्कूलों को कहा गया है कि वे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विषयों के रूप में दृश्य और प्रदर्शन कला को बढ़ावा दें. कला को कक्षा एक से 12 तक की कक्षाओं को पढ़ाना होगा. इससे शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया आसान होगी.
प्रैक्टिकल टाइम से कला के बारे में स्टूडेंट्स को बताया जाये, जिससे रटने वाली प्रक्रिया दूर होगी. इसके तहत कला प्रदर्शनी, भूमिका निर्वाह, वीडियो/फिल्म तैयार करना, फोटोशाप व अन्य एप के माध्यम से डिजाइन तरीके से तैयार कला को समझाने का प्रयास होगा. इसके तहत कविता, कहानी, तस्वीरें बनाने के साथ ऐतिहासिक स्थानों की यात्रा, मूर्तिकला, स्केचिंग, नृत्य प्रदर्शन भी शामिल हैं.
