पटना : क्षतिग्रस्त सड़कों को 14 दिनों के अंदर किया जायेगा दुरुस्त

पटना : शिकायतों का निबटारा नहीं होने पर एजेंसियों की 40% तक कट सकती है राशि सात साल तक सड़क खराब होने पर चयनित एजेंसी को ही करना है ठीक ओपीआरएमसी फेज-2 के तहत शहरी क्षेत्र की 13062.26 किमी लंबी की 1435 सड़कों के रखरखाव करने का निर्णय सड़कों की मरम्मत पर Rs 6654.27 करोड़ […]

पटना : शिकायतों का निबटारा नहीं होने पर एजेंसियों की 40% तक कट सकती है राशि सात साल तक सड़क खराब होने पर चयनित एजेंसी को ही करना है ठीक ओपीआरएमसी फेज-2 के तहत शहरी क्षेत्र की 13062.26 किमी लंबी की 1435 सड़कों के रखरखाव करने का निर्णय सड़कों की मरम्मत पर Rs 6654.27 करोड़ होंगे खर्च पूरे राज्य में 36 हजार पुरानी सड़कों की मरम्मत की योजना पहले सड़कों के निर्माण पर Rs 10 हजार करोड़ होते थे खर्च, अब सड़कों के निर्माण पर सात हजार करोड़ और मेंटेनेंस पर चार हजार करोड़ रुपये होगा का बजट.
सड़कें राज्य के विकास की वस्तुस्थिति का आइना होती हैं. शहरों में सड़कों का जाल भले ही बिछा हो, मगर गांव-गांव तक पहुंच और संपर्क की सड़कें अगर नहीं हैं या दुरुस्त नहीं हैं तो समुचित विकास की बात बेमानी हो जाती है. सड़कों का निर्माण जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है समय-समय पर सड़कों की मरम्मत.
अक्सर मरम्मत के अभाव में सड़कें दिन पर दिन खराब होती जाती हैं और समय से पहले ही नष्ट हो जाती हैं. ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने नयी मेंटेनेंस पाॅलिसी लायी है. सरकार ने सभी वर्गों की सड़कों की मरम्मत का निर्णय लिया है. इसके लिए सभी डिवीजन से मरम्मत होने वाली सड़कों की सूची मंगायी गयी है.
सड़क मरम्मत के लिए बनी नीति आउटपुट परफॉरमेंस बेस्ड रोड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट ओपीआरएमसी फेज-2 में यह प्रावधान किया गया है कि पथ निर्माण विभाग सड़क के गड्ढ़ों की शिकायत मिलने के 14 दिनों के अंदर उसको दुरुस्त करायेगा. नयी व्यवस्था के अंतर्गत अगर सड़क में गड्ढा हो तो आप फोन करें, 14 दिनों के अंदर इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी पथ निर्माण विभाग की है. शिकायत करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने फोन नंबर, व्हाट्सअप और इ-मेल की सुविधा दी है, टोल फ्री नंबर– 18003456233 , व्हाट्सअप 9470001346, वेब साइट- www.rcdbihar.in और इ-मेल complainroadmaintenance@gmail.com है. शिकायत प्रणाली ऐसी विकसित की गयी है, जिससे सड़क को बेहतर बनाये रखने के लिए एजेंसी, विभागीय इंजीनियर, थर्ड पार्टी जांच के साथ-साथ लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो सके.
विभाग ने मुख्यालय में एक कॉल सेंटर बनाया है, जिसमें कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर पर सड़क खराब होने की शिकायत कर सकता है. एजेंसी पर नकेल कसने के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर महीने में दो शिकायत मिली और तय समय में उसे दुरुस्त नहीं किया गया तो संबंधित ठेकेदार का पैसा दो बार काटा जायेगा. गंभीर त्रुटियों की शिकायतों का निबटारा नहीं होने पर एजेंसियों की 40% तक राशि काटी जा सकती है. पथ निर्माण विभाग ने ओपीआरएमसी फेज-2 के तहत शहरी क्षेत्र की 13062.26 किमी लंबाई की 1435 सड़कों के रखरखाव का निर्णय लिया है. चरणवार सड़कों को इस नीति में शामिल किया जा रहा है.
सरकार सड़कों की मरम्मत पर 6654.27 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इस नीति के तहत सात साल तक सड़क खराब होने पर चयनित एजेंसी को ही उसे ठीक करना है. नयी मेंटेनेंस नीति के तहत ग्रामीण सड़कों की मरम्मत तीन फेज में होगी. प्रथम फेज में वैसी सड़कों को प्राथमिकता दी जायेगी, जो सा साल से ज्यादा पुरानी हैं. इसके बाद वैसी सड़कों की मरम्मत की होगी, जो पांच से सात साल पुरानी हैं और अंत में वैसी सड़कों की मरम्मत होगी, जो पांच साल से कम पुरानी हैं. नयी मेंटेनेंस पालिसी में मरम्मत कार्य के लिए सड़कों का कोई वर्गीकरण नहीं किया गया है और सभी सड़कों को एक वर्ग में रखा गया है. पहले सड़क निर्माण पर 10 हजार करोड़ खर्च होते थे और मेंटेनेंस के लिए मात्र 700 करोड़ रुपये का बजट रहता था, जिससे सभी सड़कों की मरम्मत नहीं हो पाती थी.
अब सड़कों के निर्माण पर सात हजार करोड़ रुपये और मेंटेनेंस पर चार हजार करोड़ रुपये का बजट होगा, ताकि सड़कों के सुचारु निर्माण के साथ ही इसकी मरम्मत भी ठीक से हो सके. पूरे राज्य में 36 हजार पुरानी सड़कों की मरम्मत की योजना है. शुरू में सड़कों की मरम्मत पर सालाना चार हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे, लेकिन बाद में यह राशि घट कर तीन हजार करोड़ रुपये हो जायेगी.

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