पटना : फीस वृद्धि सहित कई मुद्दों को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में बुलायी गयी बैठक में निजी स्कूलों ने भी अपने मुद्दों को प्रमुखता से रखा. स्कूल संचालकों ने कहा कि सीबीएसइ नियमों का पालन करते हुए पटना में स्कूल खोलना काफी महंगा है. इसलिए फीस बढ़ाना हमारी मजबूरी भी है. संचालकों ने कहा कि सीबीएसइ के नियम के मुताबिक जमीन लेने में काफी राशि खर्च करनी पड़ती है. बेस्ट क्वालिफिकेशन देने के लिए बेस्ट क्वालिटी भी रखना होता है.
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पटना : फीस वृद्धि सहित कई मुद्दों को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में बुलायी गयी बैठक में निजी स्कूलों ने भी अपने मुद्दों को प्रमुखता से रखा. स्कूल संचालकों ने कहा कि सीबीएसइ नियमों का पालन करते हुए पटना में स्कूल खोलना काफी महंगा है. इसलिए फीस बढ़ाना हमारी मजबूरी भी है. संचालकों ने […]

अच्छा इनफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराना भी काफी खर्चीला होता है. एक स्कूल खोलने में 25 से 30 करोड़ रुपये लग जाते हैं. ऐसे में महज सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि संभव नहीं है. स्कूलों ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को सरकार किसी तरह की सुविधा नहीं देती है. ऐसे में टीचर्स की सैलेरी, बिजली बिल और अन्य तरह के खर्च को मेंटेन करना काफी मुश्किल होता है.
स्कूल के बारे में कोई नहीं सोचता : स्कूल संचालकों ने कहा कि सरकार सिर्फ आदेश देती है. स्कूलों को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जाता. कई बार बच्चे और पैरेंट्स स्कूल की मोटी फीस लेकर छोड़ कर दूसरी जगह एडमिशन ले लेते हैं. इस पर आयुक्त ने कहा कि स्कूलों को भी अपनी बातों को रखने का मौका मिलेगा. किसी की शिकायत करने पर कार्रवाई नहीं की जायेगी, बल्कि पूरी जांच होगी.
बाहर से यूनिफॉर्म में क्वालिटी की दी दलील
बाहर से यूनिफॉर्म की खरीद पर स्कूलों ने दलील दी कि बाहर से खरीदी गयी यूनिफॉर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं होती. वहीं कुछ जगह बच्चे अपने हिसाब से यूनिफॉर्म में भी डिजाइन ढूंढते हैं. एक स्कूल निदेशक ने तो सुझाव दिया कि शहर के सभी स्कूल के यूनिफॉर्म का रंग एक कर दिया जाये. इस पर आयुक्त ने कहा कि स्कूल को अपने यहां चलने वाले यूनिफॉर्म का रंग चयन करने का पूरा अधिकार है.
बस उनको सिर्फ अभिभावकों को इसकी जानकारी दे देनी है. ऐसे में मुझे नहीं लगता कि कोई भी पैरेंट्स अपने बच्चे के लिए खराब कपड़ा बनवायेगा. स्कूल यूनिफॉर्म बनवाने के लिए अभिभावक दिल्ली, मुंबई या मद्रास जायेंगे, इसकी चिंता स्कूलों को नहीं होनी चाहिए. बस स्कूल को कम से कम दो महीने पहले इसकी जानकारी दे देनी चाहिए.