पटना : अब मोन्यूमेंट (पिरामिड) के बगैर गांवों की सीमा नहीं मानी जायेगी. तीन मौजों (लगभग तीन गांव) के मिलन बिंदु पर इस पिरामिड को लगाया जायेगा. साथ ही डीजीपीएस मशीन से उसकी रिडिंग ली जायेगी. तभी एक मौजा का ग्राम-सीमा
सत्यापन बाउंड्री वेरिफिकेशन पूर्ण
माना जायेगा और इसके बाद गांव का नक्शा शुद्ध रूप से बन पायेगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने सोमवार को सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त के कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा के दौरान ये निर्देश दिये. लैंडमार्क एक 75 सेमी का पिरामिड होगा है, जो 45 सेमी जमीन के अंदर व 30 सेमी जमीन के ऊपर रहेगा. इसे छड़, बालू, गिट्टी व सीमेंट की सहायता से बनाया जाता है. बैठक में प्रधान सचिव के अतिरिक्त सर्वे निदेशक जय सिंह व अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे.
सर्वे की होगी दोबारा जांच
सर्वे के बाद जिन जिलों के गांवों के प्रारूप प्रकाशन कर दिया गया है, उनकी दोबारा जांच कर ली जायेगी. वहीं तीन जिलों मसलन, बेगूसराय, नालंदा और शेखपुरा में अब तक किये गये सर्वेक्षण के काम की भी जांच की जायेगी. तभी सर्वेक्षण की नयी टीम आगे का काम करेगी. प्रधान सचिव ने कहा कि बाकी जिलों में चल रहे सर्वेक्षण की साप्ताहिक समीक्षा होगी.
इसके अलावा 140 नये राजस्व पदाधिकारियों को सर्वे काम में लगाया जायेगा. प्राथमिकता के आधार पर चले रहे 14 जिलों के सर्वेक्षण कार्य में इनकी तैनाती की जायेगी. साथ ही इनका काम अभियान के तहत दाखिल-खारिज के मामलों को निबटाने का भी होगा. प्रधान सचिव ने सर्वे काम के प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंट, इलेक्ट्राॅनिक व सोशल मीडिया के साथ रेडियो आदि के प्रयोग करने के निर्देश दिये.
ये भी दिये गये निर्देश
सर्वेक्षण के लिए नये अधिकारियों को 9 से 28 सितंबर के बीच 21 दिनों का होगा विशेष प्रशिक्षण.
जिलों के सर्वेक्षण कार्यालयों में कार्यरत 106 संविदा अमीन को 9-16 सितंबर के बीच दी जायेगी सर्वे की जानकारी.
अक्तूबर में विशेष सर्वेक्षण अमीन, कानूनगो, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, लिपिक को दिया जायेगा प्रशिक्षण.
मोन्यूमेंट लगाने की जिम्मेदारी आइआइसी, आइएल एंड एफएस और जीआइएससी नाम की तीन हवाई एजेंसियों को दी गयी है़
