पटना : वित्त विभाग ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन को सशक्त बनाये रखने के लिए खजाने से पैसे की निकासी के लिए इसकी सीमा निर्धारित कर दी है. राशि की निकासी को चार-चार महीने के स्लॉट में बांटकर इसके लिए प्रतिशत निर्धारित कर दी गयी है. वित्त विभाग की तरफ से तय इस व्यवस्था का पालन करने के लिए सभी विभागों के प्रधान सचिव, सचिव, आयुक्त, डीएम, कोषागार पदाधिकारी समेत अन्य को वित्त विभाग ने पत्र लिखा है.
यह निकासी योजना और गैर-योजना मद दोनों के लिए समान रूप से लागू होगी. इसके अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच कुल बजट का 33 प्रतिशत, अगस्त से नवंबर के बीच 32 प्रतिशत यानी संबंधित विभाग या योजना के लिए निर्धारित कुल बजट की 65 फीसदी राशि इस समयसीमा तक खर्च कर देनी है. इसके बाद दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक बजट में किये गये प्रावधान की बची हुई राशि का शेष 35 प्रतिशत खर्च कर देना है.
इस तरह वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर निर्धारित बजट पूरी तरह से खर्च हो जायेगी. सभी विभागों को इस प्रावधान का पालन अनिवार्य रूप से करने के लिए कहा गया है. लेिकन, गृह विभाग, आपदा और निर्वाचन विभाग पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी. यह समझा जा रहा है कि सीएफएमएस प्रणाली के लागू होने के बाद से खजाने से पैसे ट्रांसफर होने में समस्या आ रही है. इस वजह भी खर्च की यह सीमा निर्धारित की गयी है.
