पढ़ाई अनिवार्य करने पर शिक्षकों की बहाली को लेकर विभाग कर रहा है मंथन
पटना : जलवायु परिवर्तन व उससे होने वाले खतरों के विषय में लगातार बढ़ रही जागरूकता व पर्यावरण को बचाने के लिए पर्यावरण विज्ञान की लोकप्रियता बढ़ने लगी है. इस क्षेत्र में नौकरी की संभावनाएं भी काफी तेजी से बढ़ रही है.पर्यावरण के क्षेत्र से जुड़ी इन नौकरियों को ग्रीन जॉब्स का नाम दिया गया है.
कॉलेजों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत एक विषय के रूप में पर्यावरण विज्ञान को अनिवार्य किया गया है. अन्य विषयों के साथ भी पर्यावरण से संबंधित मैटेरियल को शामिल करने पर मंथन हो रहा है. इसके बावजूद कॉलेजों में पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भरोसे है. जानकारों के अनुसार शिक्षकों की कमी को लेकर पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई सीमित कॉलेजों में हो रही है. जबकि सभी कॉलेजों में इसकी पढ़ाई अनिवार्य है.
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
के आधार पर यूजीसी ने ग्रेजुएशन
के स्तर पर पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई को अनिवार्य बना दिया है.स्कूल व टेक्निकल पाठ्यक्रमों के स्तर पर यह जिम्मेदारी एनसीईआरटी व एआईसीटीई को सौंपी गई है.
पद सृजित नहीं
जानकारों के अनुसार पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई के लिए सभी अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है. इसके लिए कोई पद सृजित नहीं है.अगर सभी अंगीभूत कॉलेजों में एक-एक शिक्षक बहाल हुए तो 229 शिक्षकों के पद सृजित करना होगा. शिक्षा विभाग कॉलेजों में पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई अनिवार्य करने को लेकर शिक्षकों की बहाली को लेकर मंथन कर रहा है. सूत्र ने बताया कि शिक्षकों के पद सृजित करने की दिशा में कार्रवाई को लेकर प्रस्ताव तैयार हो रहा है.
नौकरी के बढ़ेंगे अवसर
विशेषज्ञों की माने तो पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई कर निकलने वाले छात्र के लिए सुनहरा अवसर होगा. इस सेक्टर में धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है.
आनेवाले समय में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नियम-कायदे और भी स्पष्ट व कड़े होंगे. पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ विकास के फॉर्मूले को हर जगह मान्यता मिलेगी. कृषि, जलवायु परिवर्तन, वानिकी,ऊर्जा, निर्माण आदि क्षेत्रों में पर्यावरणीय मानकों का उपयोग करने की शुरुआत हो गई है.
