खगौल : संपूर्ण कल्याण विकास समिति की ओर से दल्लूचक बाजार में नुक्कड़ नाटक ‘अब खैर नहीं’ तेरा पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया. नाटक की शुरुआत गीत जवाबदेही तय हो चुकी, अगर नहीं सुधरे तो अब तेरी खैर नहीं, खैर नहीं भाई अब तेरी खैर नहीं, सरकार चाहे जो कहे लेकिन इन दिनों अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है.
दिनदहाड़े बैंक से रुपये निकाल कर जाने वक्त लूट की घटना आम बात हो गयी है. इतनी बंदिशों के बावजूद भी शराब विक्रेता पर अंकुश लगाने में सरकार विफल हो रही है. देश से तीन तलाक के विरुद्ध कानून बन गया. जो तीन तलाक के दायरे में आयेगा उसे कानूनन दंडित किया जायेगा.
बावजूद सनकी मिजाज तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने से मान नहीं रहे हैं, संस्था के महासचिव ज्ञानी प्रसाद ने दर्शकों से कहा कि आप से निवेदन है कि आप अपने आसपास ऐसी घटनाएं न होने दें. कलाकार में अंबिका प्रसाद सिन्हा, मिथिलेश कुमार पांडेय, ज्ञानी प्रसाद, सुरेश विश्वकर्मा, चंद्रदेव प्रसाद, सूरज कुमार, लक्ष्मण अकेला, इंद्रजीत गोस्वामी, ललित किशोर प्रणामी, प्रशांत कुमार, मास्टर आदित्य कुमार मंजीत समेत कई लोग मौजूद.
बेटी देंगे उसी घर में, शौचालय होगा जिस घर में : नाट्य संस्था सूत्रधार की ओर मोती चौक पर ‘बेटी देंगे उस घर में, शौचालय होगा जिस घर में’ पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया. मासिक नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वच्छता के लिए आम लोगों जागरूकता किया गया.
संस्था के महासचिव नवाब आलम द्वारा परिकल्पित एवं निर्देशित नाटक में साफ-सफाई, स्वच्छता के महत्व को बताते हुए घर में शौचालय के अभाव में महिलाओं को होने वाली परेशानियों को दर्शाया गया. आज भी लोग तरह- तरह के अंधविश्वास में पड़कर, परंपराओं की दुहाई देकर शौचालय बनवाने से कतराते हैं.
ऐसे ही दकियानूसी परिवार में अपनी बेटी की शादी के लिए एक परिवार इन्कार कर देता है. मनाने की लाख कोशिशों के बावजूद भी निर्णय यही होता है की ‘बेटी देंगे उस घर में, शौचालय होगा जिस घर में’. राकेश कुमार प्रेम द्वारा संयोजित एवं अभिनीत इस नुक्कड़ नाटक में आमोद कुमार, रवि कांत, सुधांशु मिश्रा, रंजीत कुमार, श्रवण कुमार, अंजनी कुमारी, पूजा कुमारी, शिवम कुमार, छोटू कुमार एवं रंजीत शामिल थे.
फुलवारीशरीफ में नाटक के माध्यम से शहीदों को किया गया याद
फुलवारीशरीफ. साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक शृंखला की कड़ी में सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच के कलाकारों द्वारा शहीद भगत सिंह की कुर्बानी की प्रस्तुति वाल्मी स्थित आशीष मार्केट फुलवारीशरीफ में की गयी. नाटक में सौरभ राज ने देशभक्ति गीत-आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे, शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे, बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक, भारत माता का आंचल नीलाम नहीं होने देंगे…. से की गयी.
नाटक में आजाद देश की सुरक्षित हवा में जो सांसे ले रहे हैं वह हमारे पुरखों की देन है. उसमें हमारे महापुरुष वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अंग्रेजों से देश की आजादी की लड़ाई में अपना बलिदान दिया. 23 वर्ष की उम्र में जब लाहौर जेल में बंद भगत सिंह हंसते हुए फांसी को गले लगा लिया.
मंच के वरिष्ठ रंगकर्मी महेश चौधरी द्वारा आजादी की कुर्बानी में शहीदों को नमन करते हुए यह संकल्प लिया गया की उनके बलिदान और त्याग को हम सभी रंगकर्मी मिलकर ऐसे सार्थक आयोजनों से समाज और देश में सांस्कृतिक क्रांति की ओर ले जायेंगे. नाटक के कलाकार महेश चौधरी, डॉ अनिल कुमार, मोनिका, सौरव, प्रकाश, अमन, नमन, करण, कामेश्वर, दिलीप कुमार देशवासी, राजीव आदि थे.
