पटना : खून की कमी से बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता है मन

पटना : बच्चों के शरीर में लंबे समय तक खून की कमी रहने पर उनका विकास प्रभावित होने लगता है. बच्चों को पढ़ाई में मन नहीं लगता है और वे अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं. साथ ही थकान महसूस करते हैं. ये खून की कमी के लक्षण हैं. यह कहना है हिमेटोलॉजी फाउंडेशन […]

पटना : बच्चों के शरीर में लंबे समय तक खून की कमी रहने पर उनका विकास प्रभावित होने लगता है. बच्चों को पढ़ाई में मन नहीं लगता है और वे अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं. साथ ही थकान महसूस करते हैं.
ये खून की कमी के लक्षण हैं. यह कहना है हिमेटोलॉजी फाउंडेशन ऑफ बिहार के सचिव डॉ अविनाश कुमार सिंह का. उन्होंने कहा कि इस लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें और बच्चों को संतुलित व पौष्टिक भोजन दें.
दरअसल हिमेटोलॉजी फाउंडेशन ऑफ बिहार चैप्टर की ओर से दो दिवसीय रक्त विज्ञान के तीसरे वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री डॉ एसएन आर्या, पद्मश्री डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा, आइजीआइएमएस के निदेशक डॉ एनआर विश्वास व डॉ दिनेश कुमार सिन्हा ने किया. दिल्ली एम्स हिमेटोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ रेनू सक्सेना ने ब्लड से संबंधित होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया.
उन्होंने कहा कि बच्चों में रक्त की कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसका मुख्य कारण उन्हें संतुलित आहार न मिलना है. गर्भ के दौरान माताओं के भोजन पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. आइजीआइएमएस के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ दिनेश कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में ब्लड से जुड़ी होने वाली बीमारियों में सबसे अधिक एनिमिया के मरीज हैं. सब ब्लड के मरीजों में करीब 50 प्रतिशत मरीज एनेमिक हैं.
डॉ दिनेश ने कहा कि रक्त कैंसर से जुड़ी बीमारियों का इलाज पटना में होने लगा है. इस मौके पर डॉ डीके श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से नयी बीमारियों के इलाज के बारे में आधुनिक जानकारी मिलती है. इस मौके पर कोलकाता से आये डॉ राजीव डे ने हीमोफीलिया और उसके इलाज के बारे में विस्तार से बताया.

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