कमीशन की मार : 4.8 करोड़ रुपये में पटना कॉलेज के दोनों हॉस्टलों की हुई मरम्मत, साल भर में ही गिरने लगा प्लास्टर

मिंटो व जैक्सन छात्रावास में रहने से डर रहे छात्र पटना : पटना कॉलेज में हॉस्टल के अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इसके लिए आवेदन लिये जा रहे हैं, लेकिन दोनों हाॅस्टलों मिंटो व जैक्सन की हालत खस्ता हो रही है. इन हॉस्टलों की 4.8 करोड़ रुपये से मरम्मत हुई है, लेकिन […]

मिंटो व जैक्सन छात्रावास में रहने से डर रहे छात्र
पटना : पटना कॉलेज में हॉस्टल के अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इसके लिए आवेदन लिये जा रहे हैं, लेकिन दोनों हाॅस्टलों मिंटो व जैक्सन की हालत खस्ता हो रही है.
इन हॉस्टलों की 4.8 करोड़ रुपये से मरम्मत हुई है, लेकिन बरसात आते ही प्लास्टर गिरना शुरू हो गया है. इससे छात्र हॉस्टल में रहने से कतरा रहे हैं. कॉलेज प्रशासन ने इसकी शिकायत बिहार एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से भी की. एक हफ्ते में मरम्मत का भरोसा दिया गया, लेकिन काम नहीं हुआ है.
सागवान व सखुआ की जगह प्लाइबोर्ड की चौकी दे रहा कॉरपोरेशन
दोनों ही हॉस्टलों में मरम्मत के दौरान लगभग सारे कमरों की चौकी, टेबल, कुर्सी समेत सभी तरह के फर्नीचर गायब हो गये. ये सभी सागवान व सखुआ की महंगी लकड़ी के पुराने ठोस फर्नीचर थे, जो वर्षों से चल रहे थे और मजबूत थे. चूंकि हॉस्टल कॉरपोरेशन को हैंडओवर कर दिया गया था, यह जिम्मेदारी भी उसी की थी. जब एफआइआर करने की बात हुई, तो कॉरपोरेशन द्वारा नया फर्नीचर बनाकर देने की बात कही गयी, लेकिन सागवान व सखुआ की जगह प्लाइबोर्ड की बनी चौकी दी जा रही है.
लोहे की जगह लगा दिया प्लास्टिक का नल
पटना कॉलेज के प्राचार्य प्रो आरएस आर्या ने बताया कि कॉरपोरेशन द्वारा लोहे के नल लगाने के बजाय प्लास्टिक के नल लगा दिये गये. नालियां जाम हैं. वायरिंग ठीक से नहीं की गयी है.
नैक टीम के समक्ष हो सकती है दिक्कत
कॉलेज प्रशासन के अनुसार ऐसे में नैक की टीम जब आयेगी, तो दिक्कत हो सकती है, क्योंकि पटना विश्वविद्यालय में जो टीम आयी थी, उसका भी हॉस्टलों पर अत्यधिक जोर था. अगर हॉस्टल ठीक नहीं रहेंगे, तो ग्रेडिंग में दिक्कत आ सकती है.
पटना कॉलेज के हॉस्टलों में अभी 4.8 करोड़ की लागत से काम हुआ है, लेकिन स्थिति साल भर में ही खराब होने लगी है. जैक्सन के हॉस्टल की छत गिर रही है. काॅरपोरेशन को इसकी सूचना दी जा चुकी है, लेकिन उसे ठीक नहीं किया गया है. जो काम हुए हैं, वह क्वालिटी के नहीं हैं. छात्र हॉस्टल में रहने से डर रहे हैं.
प्रो आरएस आर्या, प्राचार्य, पटना कॉलेज

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