पटना : बिहार में इस वर्ष आये जल संकट के बाद सभी जिलों के सरकारी और सार्वजनिक कुओं की खोज शुरू की गयी. पीएचइडी के सूत्रों के मुताबिक पूरे बिहार में लगभग 26 हजार कुओं की पहचान हुई है, जिनमें सात हजार से अधिक ऐसे कुएं मिले हैं, जिन्हें भरकर दुकान और मकान बना लिया गया है.
विभाग को मिली इस जानकारी के बाद अब ऐसे कुओं को कब्जा से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग लेगा. इस दिशा में काम शुरू हो गया है.
इसके लिए एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन तैयार किया है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विभाग के पदाधिकारी यह बतायेंगे कि इन कुओं को दोबारा से कैसे जिंदा करेंगे और जिन कुओं पर अतिक्रमण किया गया है, उन्हें कैसे और कितने दिनों मुक्त करायेंगे.
जिला प्रशासन के सहयोग से कुओं को किया जायेगा अतिक्रमणमुक्त
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जहां भी कुओं पर घर और दुकान बनाये गये हैं, उन्हें कब्जा मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग लिया जायेगा. इसकी शुरुआत सरकारी कुओं से होगी और प्रथम चरण में पांच सौ से अधिक कुओं को पुनर्जीवित किया जायेगा.
पीएचइडी करेगा कुओं की मॉनीटरिंग
कुओं की साफ-सफाई करने के बाद कुओं के पानी को पीने लायक बनाया जायेगा. पीएचइडी इसकी माॅनीटरिंग भी करेगा. कुओं की चारों ओर साफ-सफाई कर छोटी-सी दीवार बनायी जायेगी. जिन कुओं को दुरुस्त किया जायेगा, उनके पास जल संरक्षण के बारे में जानकारियां लिखी जायेंगी. वहीं, जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ा जायेगा.
जलसंकट के समय पानी की कमी नहीं हो
कुओं के पानी को पीने लायक बनाने के लिए सभी जिलों में सर्वे किया गया है. इसे विभाग एक हेरिटेज के रूप में विकसित करेगा, ताकि जलसंकट के समय पानी की कमी नहीं हो.
—विनोद नारायण झा
पीएचइडी मंत्री.
