पटना : खगड़िया के 253 एकड़ में फैले डैनी जलकर में जल्द ही मछली और बिजली का उत्पादन एक साथ होगा. पशु एवं मत्स्य विभाग के मत्स्य निदेशालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. इसमें बियाडा और एनएचपीसी के साथ करार होगा.
करीब आठ साल पहले घोषित इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऊपर बिजली व नीचे मछली का कंसेप्ट खगड़िया में मूर्त रूप लेगा. यहां दस मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. बियाडा और एनएचपीसी के सहयोग से यहां पर सोलर इनर्जी का उत्पादन होगा.
बिजली उत्पादन के लिए मत्स्य निदेशालय ने इसके लिए बियाडा से संपर्क किया उसके बाद एक दशक की कवायद मूर्त रूप लेने लगी. बिजली कंपनी यगां पर एंगिल के अलावा प्लोटिग सोलर पैनल भी लगायेगी. बिजली उत्पादन में संबंधित मत्स्यजीवी समिति को भी लाभ होगा. इस जलकर पर सरकार ने तो कर लगाया है, उसका 90 प्रतिशत राशि बिजली उत्पादन करने वाली कंपनी वहन करेगी. समिति को सिर्फ 10 फीसदी ही देना होगा.
जलकर में जो बिजली की खपत होगी, वह उसे मुफ्त में मिलेगी. साथ ही बिजली उत्पादन करने वाली कंपनी को मजदूर की जरूरत होगी, वह समिति से जुड़े लोग ही होंगे. अभी 25 साल के लिए लीज हुआ है. खगड़िया का यह कंसेप्ट अगर सफल रहा, तो पूरे बिहार में इसे लागू किया जायेगा.
मछली उत्पादन के लिए राज्य में बनेंगे डेढ़ हजार रियरिंग तालाब
राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए करीब डेढ़ हजार से अधिक नये तालाबों का निर्माण होगा. इसमें 1092 रियरिंग तालाब होंगे. रियरिंग तालाब में फींगर फिश ( जीरा के बाद) का पालन होगा. इसमें मछली पालन के लिए पांच सौ नये तालाब बनाये जायेंगे. केंद्र सरकार ने राज्य में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए 279.55 करोड़ की राशि मिली है.
नीली क्रांति योजना के तहत मत्स्य पालन का विकास तो होगा साथ ही आधारभूत संरचना का भी विकास होगा. हाल के वर्षों में राज्य में मछली का उत्पादन बढ़ा है. मांग और उत्पादन में मामूली 30 हजार टन का गैप रह गया है. पीएम विशेष पैकेज में मछली पालकों की निजी जमीन पर रियरिंग और नये तालाब का निर्माण होगा.
आर्द्रभूमि का विकास होगा. एक तालाब के निर्माण पर छह लाख का खर्च आयेगा. इसमें सामान्य वर्ग को 40 और एससी एसटी को 60 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा. सामान्य वर्ग के लिए 1012 रियरिंग तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
संयुक्त मत्स्य निदेशक निशात अहमद ने कहा कि राज्य में अब पर्याप्त संख्या में हैचरी हो गयी है. फिंगर फिश के लिए रियरिंग तालाब बनेंगे. रियरिंग तालाब के साथ-साथ 500 नये तालाब का भी निर्माण होगा. इसके अलावा करीब हजार सरकारी आर्द्रभूमि का विकास होगा. ताकि इनमें मछली पालन हो सके, करीब सवा सौ हेक्टेयर निजी आर्द्रभूमि को भी मछलीपालन के लिए विकसित किया जायेगा.
