पटना : डिजीलॉकर में चाहें तो आप अपने सभी सरकारी प्रमाणपत्र स्टोर रख सकते हैं. इसके लिए अलग से कागजात रखने की जरूरत नहीं है. लोगों को अपनी मूल प्रति को हर जगह लेकर आने-जाने की परेशानी से मुक्ति मिल जायेगी.आवश्यकता पड़ने पर डिजीलॉकर से प्रमाणपत्र दिखाने पर वह मान्य होगा.
डिजीलॉकर को डिजिटल इंडिया अभियान के तहत 2015 में शुरू किया गया था. सूचना प्रावैद्यिकी विभाग बिहार सरकार द्वारा लोगों की सुविधाओं के लिए डिजी लॉकर के क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को आयोजित कार्यशाला में जानकारी दी गयी. डिजीलॉकर परियोजना के टेक्निकल प्रोडेक्ट मैनेजर (भारत सरकार का हिस्सा) अमित सावंत ने डिजीलॉकर की उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक बताया. कार्यशाला में 12 विभागों के प्रतिनिधियों को डिजीलॉकर के इस्तेमाल व विभागों के द्वारा लोगों को कैसे लाभान्वित किया जा सकता है, इसके बारे में जानकारी दी गयी.
डिजीलॉकर के इस्तेमाल पर अिमत सांवत ने कहा कि पहले डिजीलॉकर खाता खोलना जरूरी है. इसके लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य है. अधिकतम 50 एमबी के डाक्यूमेंट्स अपलोड हो सकते हैं. फोल्डर बना कर भी डाक्यूमेंट्स अपलोड किये जा सकते हैं.
डिजीलॉकर के इस्तेमाल को लेकर परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया है कि वेरिफिकेशन के लिए डिजीलॉकर के डाक्यूमेंट्स भी मान्य होंगे. कार्यशाला में निबंधन विभाग के आइएएस अधिकारी अवधेश झा सहित विश्वविद्यालय व अन्य विभाग के उच्च पदाधिकारी शामिल हुए. सूचना प्रावैधिकी विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी विशाल आनंद सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.
