पटना : मुजफ्फरपुर से लौटने के बाद बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) पीड़ित बच्चों के अभिभावकों से मिले. किसी भी अभिभावकों ने कोई शिकायत नहीं की है. अस्पताल के चिकित्सकों से भी इलाज के संबंध में बात की. अस्पताल की व्यवस्था और इलाज से हमलोग संतुष्ट हैं.
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के साथ प्रेस वार्ता कर रहे बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि बिहार सरकार सभी एईएस पीड़ित बच्चों का इलाज करायेगी. साथ ही उन्होंने बताया कि मौतों का कारण मरीजों का देर से अस्पताल में पहुंचना सामने आया है. इसके बाद निर्देश दिया गया है कि मरीजों को अस्पतालों में आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा. उनके किराये का खर्च भी सरकार वहन करेगी. मरीजों के परिजनों से आग्रह है कि अस्पताल आने के लिए एंबुलेन्स का इंतजार ना करें. मरीजों को लेकर निजी वाहनों से भी तुरंत अस्पताल पहुंचे. अस्पताल लाने के लिए आर्थिक मदद के रूप में मरीज के परिजनों को 400 रुपये दिये जायेंगे.
मुख्य सचिव ने कहा कि अभिभावक ध्यान रखें की बच्चों को खाली पेट रात में ना सुलाएं. साथ ही सभी घरों तक ओआरएस का घोल पहुंचाने का निर्देश दिया गया है. पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने बीमारी के कंडीशंड भी अलग-अलग बताये हैं. किसी ने लीची खाने के बाद बीमार पड़ने की बात कही है, तो किसी ने खाली पेट होने पर फैली बीमारी की बात कही. खाली पेट होने पर बीमारी फैलने की जांच के लिए टीम कल से काम शुरू करेगी. इसके अलावा लोगों में जागरूकता के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को लगाया गया है.
मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच में पटना स्थित पीएमसीएच और दरभंगा स्थित डीएमसीएच से चिकित्सकों की टीम मुजफ्फरपुर भेजी गयी है. साथ ही एसकेएमसीएच के पीडियाट्रिक विभाग में अभी 50 बिस्तर उपलब्ध हैं. इसे बढ़ा कर 100 बेड की व्यवस्था की जायेगी. साथ ही एसके एमसीएच को 2500 बेड वाला अस्पताल बनाया जायेगा. इसके अलावा एसकेएमसीएच में धर्मशाला भी बनाया जायेगा.
