फुलवारीशरीफ : नौबतपुर के फूल कारोबारी को ट्रक ने कुचला, मौत

फुलवारीशरीफ : पटना से औरंगाबाद जा रहे नेशनल हाइवे पर बग्घा टोला के पास नौबतपुर के मोतीपुर निवासी फूल कारोबारी मुकेश मालाकार को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया. दुर्घटना में मौके पर ही मुकेश की मौत हो गयी . हादसे के बाद तेज रफ्तार ट्रक में फंसकर मुकेश काफी दूरी तक घसीटाता रहा. इस […]

फुलवारीशरीफ : पटना से औरंगाबाद जा रहे नेशनल हाइवे पर बग्घा टोला के पास नौबतपुर के मोतीपुर निवासी फूल कारोबारी मुकेश मालाकार को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया. दुर्घटना में मौके पर ही मुकेश की मौत हो गयी . हादसे के बाद तेज रफ्तार ट्रक में फंसकर मुकेश काफी दूरी तक घसीटाता रहा.
इस दौरान ग्रामीणों ने ट्रक का पीछा कर उसे रोकवाने का प्रयास किया, लेकिन चालक तेजी से ट्रक लेकर फरार हो गया. इधर, दुर्घटना से नाराज लोग नेशनल हाइवे 98 को शव के साथ जाम कर प्रदर्शन पर उतर आये. जाम से हाइवे पर सैकड़ों वाहनों की कतार लग गयी. इस भीषण गर्मी में जाम में फंसे लोग बिलबिलाते रहे.
प्रदर्शन कर रहे लोग मौके पर पहुंची जानीपुर और नौबतपुर थानों पुलिस की एक नहीं सुन रहे थे. लोगों का कहना था कि कुछ दिनों के अंतराल पर इस हाइवे पर दुर्घटना में लोगों की मौत हो रही है, लेकिन प्रशासन दुर्घटनाओं को रोकने का कोई समाधान नहीं निकाल रहा है.
उधर जैसे ही फूल माला कारोबारी मुकेश के नौबतपुर के मोतीपुर गांव स्थित घर उसकी मौत की खबर पहुंची कोहराम मच गया. जानकारी के मुताबिक मोतीपुर निवासी स्वर्गीय दुलारचंद मालाकार का 32 वर्षीय पुत्र मुकेश मालाकार रोजाना पटना से फूल माला लेकर नौबतपुर बाजार में स्थित दुकान में ले जाकर बेचने का काम करता था. रविवार की सुबह मुकेश मालाकार पटना समान लाने बाइक से जा रहा था तभी उसके गांव से करीब ढाई -तीन किलोमीटर की दूरी पर बग्घा टोला के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उसे कुचल दिया.
आक्रोशित लोगों ने वाहनों पर किया पथराव
आक्रोशित लोगों ने कई वाहनों पर पथराव कर दिया. पुलिस प्रशासन लोगों को समझा-बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी में जुटा रहा ताकि जाम खत्म हो सके.
करीब पांच घंटे के बाद पुलिस ने लोगों को मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाये जाने का आश्वासन दिया तब जाकर सड़क जाम समाप्त कराया जा सका. सड़क जाम सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक रहा. सूचना मिलते ही मृतक के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और विलाप करने लगे.
मृतक की पत्नी और तीन बच्चों का रो- रोकर हाल बेहाल था. गांव की महिलाएं उन्हें ढ़ाढंस बंधाने में खुद ही रोने लगतीं. मृतक का दस साल का पुत्र मनीष ,8 साल की बेटी निशा और 5 साल का पुत्र रंजीत अपने पिता की लाश देख लगातार रोये जा रहे थे. बार बार अपने पिता को उठाने का प्रयास करते तो कभी मां से लिपट रोने लगते.

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