पटना जंक्शन से सटा न्यू मार्केट कभी शहर की शान हुआ करता था. यहां हर माह करोड़ों का कारोबार होता था, जो 15 साल के मुकाबले करीब 60% गिरा है. कई दुकानदार अपना कारोबार बदल चुके हैं और कई इस उम्मीद में हैं कि आने वाले दिनों में फिर रौनक लौटेगी. मार्केट की हालत खराब होने का मुख्य कारण अवैध वेंडरों का अतिक्रमण है. अव्यवस्थित पार्किंग व खराब ट्रैफिक से ग्राहक आने से परहेज करने लगे हैं. असामाजिक तत्वों का भय अलग है.
बदलाव की दहलीज पर 78 साल पुराना न्यू मार्केट
पटना जंक्शन से सटा न्यू मार्केट कभी शहर की शान हुआ करता था. यहां हर माह करोड़ों का कारोबार होता था, जो 15 साल के मुकाबले करीब 60% गिरा है. कई दुकानदार अपना कारोबार बदल चुके हैं और कई इस उम्मीद में हैं कि आने वाले दिनों में फिर रौनक लौटेगी. मार्केट की हालत खराब […]

इन सबके बीच अब स्मार्ट सिटी योजना के तहत जीपीओ गोलंबर से स्टेशन गोलंबर तक का इलाका विकसित होना है. ऐसे में दुकानदारों को आशंका है कि न्यू मार्केट इतिहास बन जायेगा. पढ़िए सुबोध नंदन की रिपोर्ट.
बस स्टैंड हटा, संकट बढ़ा
होटल कारोबार पर असर
इसका सबसे अधिक असर होटल कारोबार पर पड़ा है. जहां पहले दिन-रात ग्राहकों से गुलजार रहता था अब ग्राहकों के इंतजार में होटल मालिक बैठे रहते हैं. होटल मालिकों की मानें, तो आज से कुछ साल पहले हजार रुपये प्रतिदिन कमा लेते थे. आज पांच-छह सौ रुपये कमाना भी मुश्किल हो गया है.
दुकान हटाने पर नेतागिरी
अवैध फुटपाथी दुकानदारों को दुकानदार हटाना चाहते है, तो विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाता है. इस कारण इस मार्केट की समस्या दिनों-दिन खराब होती जा रही है. दुकानदारों की मानें, तो कई-कई दिन बोहनी तक नहीं होती है. वेंडर के कारण सड़क पर दो-दो लेन की दुकानें लग रही है. जब-जब कोर्ट सख्त होता है. तब प्रशासन सजग होता है और एक-दो दिन सामान्य रहता है. फिर पुराने लीक पर लौट आता है.
मशहूर दुकानें अब भी
इस मार्केट की पुरानी दुकानें शहर में मशहूर थीं. इनमेें कमला स्टोर, मंसूर हसन एंड संस, नाथ फोटो स्टेट, चोपड़ा फार्मेसी, मोदी ब्रदर्स, जैन स्टोर, पोपुलर फार्मेसी, पादुकालय, सेन फार्मेसी, शर्मा आयुर्वेदिक स्टोर, दिलीप वॉच, बिन्नी टेक्सटाइल, स्वदेशी क्लाथ हाउस, दयाल बाग, राय टी, आशा स्टोर, अग्रवाल स्टोर, डैकबैग, दसई साव, न्यू कमला स्टोर आदि दुकानें जहां दूर-दूर से ग्राहक आते थे.
क्या-क्या मिलता है यहां
इस मार्केट में जन्म से लेकर इंसान के अंतिम संस्कार के सामान मिलते है. यहीं कारण है कि हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी जरूरत का सामान लेने आते थे. आज हालात बिल्कुल बदल गये है. यही कारण है कि यहां रेडिमेड कपड़ा, पेंट, बर्तन, मिठाई, दवा, किराना, पूजा सामग्री, पान, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिक, ज्वेलरी, जूते-चप्पल, घड़ी, खिलौना, कप-प्लेट आदि की दुकानें रह गयीं हैं.
जीपीओ गोलंबर से स्टेशन गोलंबर
438 करोड़ से बदल जायेगी सूरत
अब स्मार्ट सिटी के तहत जीपीओ गोलंबर से स्टेशन गोलंबर तक विकसित होना है. 438 करोड़ रुपए खर्च होने पर इस इलाके की सूरत बदल जायेगी. इसके तहत कई प्रोजेक्ट पर काम होना है. इसके लिए डिजाइन व डीपीआर तैयार कर ली गयी है. पढ़िए रिपोर्ट.
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होगा काम
जीपीओ गोलंबर से स्टेशन गोलंबर तक सड़क के दोनों किनारे नगर निगम की जमीन को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकसित करने की योजना है. सड़क के दोनों किनारे भूखंड की डिजाइन व डीपीआर तैयार कर ली गयी है. 438 करोड़ की लागत से अलग-अलग शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फुटपाथ, पार्क व आंतरिक सड़क बनाये जायेंगे. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने को एजेंसी का चयन हो गया है.
तीन मार्केट कॉम्प्लेक्स बनेंगे
जीपीओ से स्टेशन गोलंबर जाने वाली सड़क के उत्तर निगम की सात एकड़ से अधिक भूखंड है. इस भूखंड पर तीन मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाये जायेंगे. एक मार्केट फल, सब्जी और दूध की होगी, दूसरी मार्केट में वर्तमान दुकानदारों को रि-सेटलमेंट किया जायेगा और तीसरे मार्केट में मछली मार्केट होगी. इसको लेकर अलग-अलग जगह का चयन किया गया है. खाली जगहों पर पौधे लगाये जायेंगे.
जीपीओ गोलंबर के पास वेंडिंग जोन
स्टेशन गोलंबर से हटेगा दूध मार्केट
दुकानदार मुफ्त में होंगे सेटल
दुकानदारों की सुनिए
पटना शहर में हर जगह मार्केट का विकास हुआ. उसके मुकाबले न्यू मार्केट में विकास का काम नहीं हुआ. बल्कि, ट्रैफिक के मकड़जाल में फंस गया. आज भी मार्केट की गलियां कच्ची हैं. जबकि, दर्जनों बार विधायक से लेकर मंत्री और नगर निगम के मेयर से लेकर आयुक्त तक को पत्र लिखा जा चुका है. लेकिन, वर्षों बाद उस गली की सूरत तक नहीं बदली.
कौशल पटवारी, नेशनल स्टोर
दो साल से सुन रहा हूं कि स्मार्ट सिटी के तहत न्यू मार्केट को स्मार्ट बनाया जायेगा. लेकिन, अफसोस की बात यह है कि अब तक सरकार की ओर से न्यू मार्केट दुकानदार कल्याण समिति के सदस्यों को न तो डीपीआर दिखायी गयी है और न ही प्रोजेक्ट के बारे में बताया गया है. जब तक स्मार्ट सिटी का डीपीआर हम लोग नहीं देख लेंगे, तब तक इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ने देंगे.
फैसल इमाम, मंजूर हसन स्टोर
1. अवैध वेंडरों का अतिक्रमण
2. व्यवस्थित पार्किंग नहीं
3. खराब ट्रैफिक व्यवस्था से पैदल चलना मुश्किल
4. असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
5. अवैध दुकानों की बढ़ती संख्या
6. एक शौचालय तक नहीं
7. पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं
8. मार्केट के चारों ओर गंदगी का अंबार