न शराबबंदी मुद्दा, न अवैध कारोबार की ही चर्चा

पटना : राज्य में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. शराबबंदी के बाद से ही राज्य में सत्ता पक्ष इसको अपनी उपलब्धि मानता रहा है. सता के नेता बड़े मंचों से शराबबंदी की लगातार प्रशंसा करते रहे हैं. वहीं राज्य में जदयू के साथ आने के बाद भाजपा के नेता भी इसे बड़ी उपलब्धि […]

पटना : राज्य में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. शराबबंदी के बाद से ही राज्य में सत्ता पक्ष इसको अपनी उपलब्धि मानता रहा है. सता के नेता बड़े मंचों से शराबबंदी की लगातार प्रशंसा करते रहे हैं. वहीं राज्य में जदयू के साथ आने के बाद भाजपा के नेता भी इसे बड़ी उपलब्धि ही मानते रहे हैं.

वहीं राजद की ओर से लगातार राज्य में अवैध शराब के कारोबार होने, बंदी का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने का हवाला देते रहे हैं. मगर, अब शराबबंदी के बाद लोकसभा चुनाव में कोई भी नेता इसे मुद्दा नहीं बना रहा है. राज्य व केंद्र में सत्ता में रही एनडीए सरकार अपने मंचों से इसकी उतनी चर्चा नहीं कर रही है.
वहीं महागठबंधन के नेता भी इसके विरोध में शराबबंदी के बाद अवैध कारोबार की चर्चा मंच से नहीं कर रहे हैं. कुल मिला कर मसला है कि आखिर इतना बड़ा फैसला इस बार चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पा रहा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >