खंडपीठ ने आपराधिक अवमानना का मामला शुरू करते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था
पटना : पूर्व आइएएस अधिकारी केपी रामय्या मंगलवार को अपने वकील के साथ मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हुए. निजी मुचलका भरने पर खंडपीठ से उन्हें दो दिनों की राहत मिल गयी.
अब दो मई को अगली सुनवाई होगी. खंडपीठ ने रामय्या के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला शुरू करते हुए पिछले दिनों गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. कोर्ट ने बिहार पुलिस को कहा था कि हर कीमत पर रामय्या को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाये.
मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ में रामय्या द्वारा दायर अपील पर जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, रामय्या अपने वकील के साथ खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हो गये. रामय्या की ओर से वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरि ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को हाइकोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी नहीं थी.
इसलिए वह समय पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके. वह जानबूझकर हाइकोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर रहे थे. याचिकाकर्ता वरीय आइएएस अधिकारी हैं और उसे यह मालूम है कि कानून का पालन किया जाना आवश्यक है. श्री गिरि ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता हाइकोर्ट के सभी आदेश का पालन करने को तैयार हैं.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इस पीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई तीन मई को होनी है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दायर अपनी अपील, जिसकी सुनवाई इस खंडपीठ में चल रही है, उसे वापस लेना चाहता है.
उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान में बिहार लैंड ट्रिब्यूनल डीएलटी का प्रशासनिक सदस्य हैं और वहां से भी अपना त्यागपत्र देने वाले हैं. याचिकाकर्ता को सुनने के बाद खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई दो मई को निर्धारित करते हुए रामय्या से कहा कि वे रजिस्ट्रार के सामने जाकर अपना बेल बांड भर दें.
