राज्य के कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए अप्रैल और मई में विशेष क्लास
पटना : शिक्षा विभाग ने इस वर्ष पांचवीं और आठवीं कक्षा में फेल छात्र-छात्राओं के लिए जून महीने में पूरक परीक्षा करवाने का निर्णय लिया है.
इसकी तैयारी एक अप्रैल से करवाने के लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दिया है. निर्देश के अनुसार पांचवीं और आठवीं कक्षा के वैसे छात्र-छात्रा जो वार्षिक परीक्षा में फेल हो गये हैं, उनके लिए अप्रैल-मई में विशेष शिक्षण की व्यवस्था की जानी है. विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने कहा है कि अप्रैल और मई में प्रत्येक कार्य दिवस को विशेष कक्षा संचालन द्वारा डेली रूटीन बनाकर उसका पालन किया जाये.
13 जिलों में कक्षा के लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम
बता दें कि राज्य के 13 जिलों में तीसरी और पांचवीं कक्षा के लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इसमें अररिया, अरवल, जहानाबाद, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, मुंगेर, नालंदा, पटना (शहरी क्षेत्र), पूर्णिया, सहरसा, सुपौल और वैशाली शामिल हैं. इसके अलावा आगा खां फाउंडेशन के सहयोग से चार प्रखंडों में विशेष शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. इसमें पटना जिला के फुलवारीशरीफ और दानापुर प्रखंड व समस्तीपुर जिला के पूसा और ताजपुर प्रखंड शामिल हैं.
पटना जिले में करीब दो फीसदी बच्चे फेल
पटना जिले में करीब दो फीसदी बच्चे फेल हैं. दरअसल यह वे बच्चे हैं, जो इ-ग्रेड के हैं. ऐसे बच्चों की संख्या अकेले पटना जिले में करीब पांच हजार है. इन बच्चों को फिर से दो माह तक पढ़ाया जायेगा. इसके बाद दोबारा परीक्षा ली जायेगी. अगर उस परीक्षा में ये बच्चे पास हुए तो उनकी क्लास अपडेट की जायेगी, अन्यथा फिर उसी क्लास में पढ़ना पड़ेगा.
गुणवत्ता पर पड़ रहा था असर
आरटीइ में विशेष प्रावधान जोड़ने से पहले बिहार सरकार ने विशेषज्ञों से सुझाव लिये थे. विशेषज्ञों के पैनल ने राय दी थी कि कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त क्लास लगाएं. अगर वे फिर भी फेल होते हैं, तो क्लास अपडेट नहीं किया जाये. दरअसल लगातार पास करने से उच्च कक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है.
यह प्रावधान जोड़ने वाला पहला राज्य
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बिहार आरटीइ में यह अभूतपूर्व प्रावधान जोड़ने वाला देश का पहला राज्य है. जानकारों के मुताबिक प्राइमरी एवं मिडिल एजुकेशन की गुणवत्ता सुधार की दिशा में यह अहम कदम उठाया गया है. आरटीइ में आठवीं कक्षा तक अभी तक फेल न करने का नियम है. फिलहाल इ-ग्रेड के विद्यार्थी अर्थात जिनके वार्षिक परीक्षा में 33 फीसदी से कम मार्क्स हैं, की कक्षाएं नये सत्र में शुरू हो गयी हैं. यह कवायद समूचे प्रदेश में एक साथ प्रभावी की गयी है.
