पटना : साल के पहले 100 दिन शहर में अच्छी श्रेणी की हवा नहीं बह सकी है. हालांकि जनवरी और फरवरी की तुलना में मार्च में हवा की गुणवत्ता में कुछ संतोषजनक सुधार दिखाई दिये हैं. उदाहरण के लिए पटना में मार्च में सीवियर एयर (कष्टदायक हवा) एक भी दिन नहीं चली. मार्च में अत्यंत प्रदूषित हवा क्रमश: तीन और सात दिन ही बही है. हालांकि इसकी वजह एयर क्लीन करने बनाया गया एक्शन प्लान नहीं, बल्कि मौसम को जिम्मेदार बताया जा रहा है.
मौसमी दशाओं ने हवा की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित किया है, इसे सहज ही समझा जा सकता है. जनवरी में जबरदस्त सर्दी के बीच कष्टदायक हवा 14 दिन चली. 13 दिन हवा की गुणवत्ता बहुत खराब रही. शेष चार दिन खराब श्रेणी की हवा बही. फरवरी में कष्टदायक हवा केवल एक दिन चली. 15 दिन बहुत खराब, सात दिन खराब और चार दिन हवा की गुणवत्ता मोडरेट रही. मार्च में हवा की गुणवत्ता में कुछ और सुधार हुआ, महीने में केवल तीन दिन बहुत खराब, सात दिन खराब, मोडरेट 19 दिन और संतोषजनक हवा केवल एक दिन बही.
जानकार तर्क देते हैं कि सर्दियों में कुहरा आदि की वजह से आसमान में धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते, जिससे उनका घनत्व बढ़ा रहता है, लेकिन गर्मी में इसके विपरीत होता है. हालांकि अप्रैल माह के शुरुआती 10 दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकारी प्रयास का भी लाभ दिखा है. शहर की कुछ सड़कों पर सुबह और शाम पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है. कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने कुछ जगहों पर निर्माण को ग्रीन परदे से कवर किया है.
बदलते मौसम और आंशिक तौर पर सरकारी सक्रियता के चलते सुधार के संकेत
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अप्रैल माह में वायु की गुणवत्ता में सुधार की कमान सीधे मुख्य सचिव ने संभाल रखी है. उन्होंने सीधे डीएम को इस दिशा में जरूरी दिशा-निर्देश दिये हैं.
हालांकि हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अब भी कुछ खास कदम उठाये जाने बाकी हैं, जैसे-शहर में अब भी खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है, लैंड फिल साइटें तय नहीं हो सकी हैं. निगम कहीं भी मौका देकर शहर के आसपास ही कचरा डंप कर रहा है. शहर में मापदंड से ज्यादा धुआं उत्सर्जन करने वाले वाहनों को नियंत्रित नहीं किया जा सका है. संचार और पाइप लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट से जुड़े अनियंत्रित खनन को रोका नहीं जा सका है.
जल्द दिखेगा असर
हवा की गुणवत्ता को प्रयास हो रहे हैं. एक्शन प्लान को प्रभावी तौर पर लागू करने के लिए शीर्ष अफसर लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं. जल्द ही सकारात्मक असर दिखेंगे. प्रदूषण नियंत्रण में मौसम भी सहयोगी रहा.
एसएन जायसवाल, पर्षद विश्लेषक, बिहार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
