पटना : वित्तीय वर्ष 2018-19 की समाप्ति और जिला निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री के आंकड़े आने के बाद मार्केट में एक सकारात्मक उम्मीद बनी है. एक बार फिर बीते दो-तीन वर्ष में मंद पड़े रियल स्टेट के कारोबार में उछाल आने की संभावनाएं बढ़ी हैं. मार्केट के जानकार बता रहे हैं कि नोटबंदी व जीएसटी के बाद एकदम से धड़ाम हुआ कारोबार अब पटरी पर लौट रहा है. बिहार इंड्रस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष केपीएस केशरी बताते हैं कि जमीन व फ्लैटों की रजिस्ट्री का बढ़ना एक अच्छी बात है.
इससे मार्केट में पैसा घूमता है और पूरे बाजार को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है. ऐसे में अगर एक वर्ष में 8861 रजिस्ट्रियां बढ़ी हैं, बीते वर्ष के मुकाबले जिले में 111 करोड़ अधिक का कारोबार हुआ है, तो अच्छी बात है.
मगर पुराने फ्लैटों की रजिस्ट्री से नहीं हटी रोक : केपीएस केशरी बताते हैं कि 2017 के मई के पहले पूरा होने वाले फ्लैटों पर रेरा की ओर से अनिवार्यता हटाने के बाद भी रजिस्ट्री विभाग ने इस पर रोक नहीं हटायी है.
इसी कारण पुराने फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं हो रही है. उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में जमीन के मामले अधिक है. कई बार लोग इंतजार के बाद जमीन की बिक्री करते हैं. कई बार मजबूरी होती है. कई बार कारोबार भी होता है. इस कारण से जमीन की खरीद बिक्री अधिक हो रही है. उन्होंने बताया कि अगर सरकार अपने स्तर से पहल कर पुराने फ्लैटों में रेरा की अनिवार्यता को हटाये, तो मार्केट में और उछाल आयेगा.
बिल्डर व अन्य लोग रेरा को समझने लगे हैं
वहीं बिल्डर एसोसिएशन के बिहार चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष मणिकांत बताते हैं कि पुराने फ्लैटों की रजिस्ट्री का मामला तो है. अगर रोक हटती तो अधिक रजिस्ट्री का आंकड़ा दस हजार के पार जाता. उन्होंने बताया कि नये निर्माण शुरू हो रहे हैं. उनको पूरा होने में दो से तीन वर्षों का समय लगेगा. इस कारण अगले दो वर्षों में रजिस्ट्री में जमीन के अलावा फ्लैटों के मामले भी बढ़ेंगे.
