रैली व जनसभा को लेकर एसडीओ ऑफिस से लेना होगा परमिशन
पटना : लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों, उम्मीदवारों को प्रचार करने के अनुमति की अनिवार्यता की गयी है. इसके लिए जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से सिंगल विंडो की सुविधा दी जायेगी. सिंगल विंडो सिस्टम अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय से काम करेगा.
यहां प्रचार के लिए सभा करने, जुलूस निकालने और प्रचार के लिए माइक का प्रयोग करने आदि के लिए अनुमति प्रदान की जायेगी. डीएम कुमार रवि ने बताया कि 24 घंटे के भीतर अनुमति प्रदान करने की कोशिश रहेगी. इसके लिए इसका ध्यान रखा जायेगा कि अमुक शैक्षणिक संस्थान में शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित नहीं हो या सरकारी भवन में कामकाज प्रभावित नहीं हो.
निजी वाहन से जाकर देंगे वोट
चुनाव के दौरान वाहन के परिचालन पर कोई विशेष असर नहीं रहे. इसका पूरा ध्यान रखा जायेगा. डीएम ने बताया कि इसके लिए बूथ के 200 मीटर पहले तक निजी वाहन जा सकेंगे. जिले के लगभग 31 हजार दिव्यांगों को बूथ तक जाने व वापस छोड़ने के लिए भी प्रशासन व्यवस्था करायेगा. इसके लिए किस तरह के दिव्यांग हैं. इसका डाटा तैयार किया जा रहा है.
सुरक्षा व हेलीपैड की देनी होगी गारंटी
प्रचार के लिए अनुमति देने से पहले राजनीतिक पार्टियों या उम्मीदवार को इस बात के लिए प्रशासन को आश्वस्त करना होगा कि रैली, सभा के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर कोई परेशानी नहीं आयेगी. इसके अलावा अगर किसी के निजी जमीन पर कोई सभा या रैली होती है, तो आवेदनकर्ता को खुद अपने स्तर से उनके सहमतिपत्र लेकर प्रशासन को देना होगा. इसके अलावा हेलीकॉप्टर लैंडिंग में भी इस हेलीपैड को बनाने के लिए अनुमति लेनी होगा.
…वहीं रैली या सभा के दौरान मंच की मजबूती के लिए भवन निर्माण के कार्यपालक अभियंता उसकी जांच करेंगे. मंच की क्षमता के अनुसार ही मंचपर लोग आएं, इसके लिए भी आयोजन कर्ता को प्रशासन को गारंटी देनी होगी.
10 दिनों में संवेदनशील बूथों की सूची
वहीं जिले में संवेदनशील व अतिसंवेदनशील बूथों की संख्या भी तैयार की जा रही है. प्रशासन इसके लिए सर्वे कर रहा है. इसमें चयन में पूर्व में हंगामा की घटना, जातीय व सांप्रदायिक तनाव या किसी को वोट करने से रोकने की घटना का पूरा ध्यान रखा जायेगा. बतौर डीएम 10 दिनों के भीतर इसके अलावा पिंक बूथ की संख्या भी जारी की जायेगी.
मतदान में हस्तक्षेप किया तो मिलेगी तीन माह की सजा
जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी कुमार रवि ने मंगलवार को सरकारी सेवकों के अनुपालन के लिए गाइडलाइन जारी की. चुनाव के दौरान व पूरी प्रक्रिया की समाप्ति के दौरान सरकारी कर्मियों को क्या नहीं करना है. इसके बारे में जानकारी दी गयी. डीएम ने कहा कि कोई भी सरकारी कर्मी चुनावी जनसभा में उपस्थित नहीं होंगे.
सरकारी विभाग का वाहन भी चुनाव प्रचार में प्रयोग नहीं होगा. राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के सार्वजनिक सभाओं में प्रयोग के लिए विभागीय लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं होगा. डीएम ने कहा कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम चार की उपधारा (4) में ऐसा प्रावधान है कि निर्वाचन में सरकारी सेवक प्रचार नहीं करेंगे अथवा हस्तक्षेप नहीं करेंगे या अन्यथा अपने प्रभाव का प्रयोग नहीं करेंगे या निर्वाचन में भाग नहीं लेंगे. वहीं, सरकारी कर्मी अपने मत का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं.
लेकिन वोट डालने, किसी पार्टी को वोट दिया है या देना है. इसका कोई आभास नहीं देना होगा. चुनाव के दौरान सरकारी कर्मियों को निष्पक्ष होने के साथ निष्पक्ष दिखना भी आवश्यक है. इसके अलावा राजनीति सभाओं में भाग लेना, किसी भी पार्टी को चंदा देने पर रोक रहेगी.
वोटर हेल्प लाइन एप का करें उपयोग
चुनाव के दौरान मतदान केंद्र, मतदाता सूची से लेकर अन्य जानकारियों के लिए आम लोग वोटर हेल्प लाइन एप की मदद ले सकते हैं. डीएम कुमार रवि ने बताया कि एड्रायड एप आम लोगों उपयोग के लिए काफी आसान बनाया गया है. इस पर नाम व पिता का नाम डाक कर मतदान केंद्र, मतदाता सूची से लेकर अन्य जानकारी ले सकते हैं.
