अनुराग प्रधान
महिला आयोग गर्ल्स हॉस्टलों की करेगा मॉनीटरिंग
पटना : बिहार के सभी गर्ल्स हॉस्टलों को बिहार राज्य महिला आयोग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. लड़कियों की सुरक्षा को लेकर आयोग ने यह कदम उठाया है.
हॉस्टलों में मौजूदा सुविधा के साथ-साथ वहां काम करने वाले सभी लोगों की जानकारी भी देनी होगी. ताकि, हॉस्टलों की ओर से दिये गये डाटाबेस से नजर रखी जायेगी. छात्रावास के रजिस्ट्रेशन होने के बाद आयोग कभी भी किसी भी गर्ल्स हॉस्टलों की जांच करेगी. यह नियम पूरे बिहार के गर्ल्स हॉस्टलों के लिए लागू होगा.
हालांकि, इसकी शुरुआत राजधानी के सभी गर्ल्स हॉस्टलों से की जायेगी. लेकिन, बिहार के अन्य जिलों में संचालित गर्ल्स हॉस्टलों के संचालक आयोग में अपने कागजात जमा करवा सकते हैं. इसकी खुली छूट है. इसमें हॉस्टलों को राज्य सरकार से भी रजिस्टर्ड करवाना होगा. आयोग ने कहा कि दोनों जगहों से गर्ल्स हॉस्टलों को रजिस्टर्ड होना बहुत ही जरूरी है.
आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्र ने कहा कि मार्च में वेबसाइट लांच होने के बाद आयोग में काफी कुछ बदल जायेगा. हर मामलों में लोगों को वेबसाइट पर अपडेट मिलता रहेगा. वहीं, आयोग की सदस्य उषा विद्यार्थी का कहना है कि पटना शहर में कई ऐसे हॉस्टल हैं, जो बिना रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ अनऑथराइज्ड हैं. वह कहती हैं कि इस तरह के हॉस्टल पर नकेल कसना जरूरी है.
कई ऐसे इलाके हैं, जहां हॉस्टल में रह रही छात्राओं के साथ छेड़खानी के मामले आते रहते हैं. इसलिए यह कदम उठाना जरूरी था.
सुरक्षा पर नजर : गर्ल्स हॉस्टल की कई शिकायतें हमेशा मिलती रहती है. इस कारण आयोग का कहना है कि हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर हॉस्टल को बंद करने का निर्देश भी दिया जा सकता है. यह सुनिश्चित किया जायेगा कि जो हॉस्टल चल रहे हैं, उनमें छात्राओं के लिए बुनियादी चीजें हैं या नहीं. उनकी सुरक्षा के लिए हॉस्टल में गार्ड 24 घंटे रहने चाहिए. मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाने जरूरी हैं.
