पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य में 1717 दारोगाओं की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए बिहार सबोर्डिनेट पुलिस सर्विस कमीशन से कहा कि वह पूर्व में प्रकाशित मेधा सूची के अनुसार दारोगा के पदों पर नियुक्ति कर सकता है. खंडपीठ ने बिहार सबऑर्डिनेट पुलिस सर्विस कमीशन की ओर से दायर अपील पर यह आदेश दिया.
इससे पहले न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने राज्य में दारोगा बहाली परीक्षा में अनियमितता को लेकर रमेश कुमार एवं अन्य 195 रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरी बहाली प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था. एकलपीठ ने कमीशन से कहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया में कई गड़बड़ियों काे सुधार कर नये सिरे से मेधा सूची प्रकाशित कर नियुक्ति करे.
एकलपीठ के इसी आदेश के खिलाफ बिहार सबऑर्डिनेट पुलिस सर्विस कमीशन ने हाइकोर्ट में अपील दायर कर की थी. इस पर सुनवाई पूरी कर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे मंगलवार को सुनाया.
मालूम हो कि राज्य में दारोगा की 1717 रिक्तियों के लिए कमीशन ने 22 जुलाई, 2018 को मुख्य परीक्षा आयोजित की थी. इसमें 29,359 अभ्यार्थी शामिल हुए थे. मुख्य परीक्षा में 10,161 अभ्यर्थी सफल घोषित किये गये थे. असफल करीब 195 अभ्यार्थियों ने रिट याचिका दायर कर कमीशन द्वारा मनमानी और बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी की शिकायत करते हुए मुख्य परीक्षा परिणाम को निरस्त करने का अनुरोध किया था.
एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए पांच सितंबर, 2018 को नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम रिजल्ट के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी. उसके बाद एकलपीठ ने मुख्य परीक्षा के परिणाम को सभी पक्षों को सुनने के बाद निरस्त कर दिया था. एकलपीठ के इसी आदेश को कमीशन ने खंडपीठ में चुनौती दी गयी थी.
