पटना : बिहार राज्य मिड डे मिल रसोइया वर्कर्स यूनियन (सीटू) सहित तमाम रसोइया संगठन एक मंच पर आये और यहां गर्दनीबाग में आवाज बुलंद की. महापड़ाव कार्यक्रम के तहत गुरुवार को दूसरे दिन कार्यकर्ताओं ने सरकार को आड़े हाथ लिया. साथ ही, चार फरवरी को बिहार में चक्का जाम करने का ऐलान किया. सरकार के संयुक्त सचिव के साथ वार्ता असफल रही है. उधर, भाकपा (मार्क्सवादी) पटना जिला सचिव मनोज कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि हड़ताल का पार्टी समर्थन करती है.
यूनियन के अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि 14 सूत्री मांगों को लेकर सात जनवरी से खाना बंद कर प्रदेशभर की रसोइया हड़ताल पर हैं. इस बीच प्रखंड, अनुमंडल तथा जिला स्तरीय आंदोलन के माध्यम से प्रशासन से मांगें मनवाने का प्रयास किया गया. ऐसा नहीं होने पर पूरे राज्य की रसोइयों ने 23 और 24 जनवरी को महापड़ाव के माध्यम से राजधानी में डेरा डाला. सीटू नेता गणेश शंकर सिंह ने बताया कि एक फरवरी तक मांगें नहीं मानी गयीं तो चार फरवरी को पूरे बिहार में चक्का जाम किया जायेगा.
रामपरी, सरोज चौबे, रमाकांत अकेला, अनामिका, सूर्यकर जितेंद्र, विश्वनाथ सिंह, रणविजय कुमार, संजय कुमार, जनवादी नौजवान सभा के मनोज कुमार चंद्रवंशी आदि थे.रसोइया को सरकारी सेवक घोषित किया जाये, समान काम का समान वेतन के तहत उन्हे भी 18000 रुपये मानदेय दिया जाये, स्वास्थ्य, बीमा, साल मे दो जोड़ी ड्रेस,खाना बनाने के लिये रसोई गैस, 10 माह के बदले 12 माह का मानदेय दिया जाये.
