पटना : कुपोषण और बौनेपन के बढ़ते खतरे ने सरकार को आगाह कर दिया है. सचेत हुई सरकार ने अब चौतरफा काम शुरू किया है. इसके तहत नये साल से हर माह की सात तारीख को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोदभराई उत्सव मनाया जायेगा. इसमें गर्भवती के साथ ही घर की बुजुर्ग महिलाओं को भी आमंत्रित किया जायेगा. आईसीडीएस के डायरेक्टर आलोक कुमार ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर अब हर माह दो आयोजन आंगनबाड़ी केंद्रों पर किये जायेंगे. पहले हर माह की 19 तारीख को अन्न प्राशन दिवस मनाया जाता था. अब गोदभराई उत्सव भी शामिल हो गया है.
बिहार और झारखंड में स्थिति अच्छी नहीं
बिहार और झारखंड में 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं. यह समस्या सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. बच्चे भी इस समस्या में जकड़े हुए हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-4 की रिपोर्ट की मानें तो बिहार में छह से 59 माह के 63.5 प्रतिशत बच्चे भी ‘एनीमिक’ हैं. झारखंड में यही आंकड़ा 69.9 तक पहुंच जाता है. इतना ही नहीं, बिहार में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाओं का बीएमआइ (बॉडी मास इंडेक्स) सामान्य से कम है. एनएफएचएस-2 की रिपोर्ट में इसका खुलासा होता है.
…रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 30.4 प्रतिशत महिलाओं का बीएमआइ सामान्य से कम मिला है. झारखंड में यही आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. जबकि, इन दोनों राज्यों में पुरुषों की स्थिति काफी अच्छी है.
– खराब स्थिति वाले देश भर के सौ जिलों में शामिल सूबे के जिले जिले और कुपोषण का प्रतिशत
– अररिया 57%
– दरभंगा 57.1%
– सहरसा55%
– सुपौल53.4%
– पूर्णिया48.4%
– मुजफ्फरपुर 48.1%
– सीतामढ़ी47.1%
– प. चंपारण 46.7%
– शिवहर 45.9%
– मधेपुरा43.6%
– समस्तीपुर41.1%
– खगड़िया38%
– पू. चंपारण37.8%
– कटिहार37.4%
– किशनगंज 5.3%
– सीवान33%
– वैशाली 32.4%
– सबसे खराब स्थिति के 100 जिलों की सूची में बिहार के 17 जिले शामिल
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार बिहार के पांच से 18 वर्ष तक के बच्चे-युवा कुपोषण की गिरफ्त में हैं. कुपोषण के मामले में सबसे खराब स्थिति वाले सौ जिलों की सूची भी जारी की गयी है. इसमें बिहार के 17 जिले शामिल हैं. खास बात यह है कि बिहार में 33 प्रतिशत कुपोषित और 21.7 प्रतिशत अतिकुपोषित बच्चे-युवा मिले हैं. वर्ष 2014-15 में लिये गये आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट जारी हुई थी.
बिहार में 33.8 और राजस्थान में 33.7 प्रतिशत पांच से 18 वर्ष के बच्चे-युवा कुपोषित हैं. ग्रामीण इलाकों में लड़कियों के मामले में भी बिहार टॉप पर है. बिहार की 30.5 प्रतिशत लड़कियां भी कुपोषण की शिकार हैं. उत्तराखंड में सबसे कम 17.8 प्रतिशत लड़कियां कुपोषित हैं.
