बदलते मौसम को देख होगी खेती, विकसित किया जायेगा सिस्टम

पटना : राज्य के किसान अब बदलते मौसम के अनुसार खेती कर पायेंगे. कृषि विभाग जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में हो रहे बदलाव को देखते हुए इस योजना को गति देने में जुट गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों कृषि रोडमैप की समीक्षा के दौरान जलवायु परिवर्तन के कारण जो मौसम में […]

पटना : राज्य के किसान अब बदलते मौसम के अनुसार खेती कर पायेंगे. कृषि विभाग जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में हो रहे बदलाव को देखते हुए इस योजना को गति देने में जुट गया है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों कृषि रोडमैप की समीक्षा के दौरान जलवायु परिवर्तन के कारण जो मौसम में बदलाव आये हैं, उसे देखते हुए फसल चक्र में परिवर्तन करने की सलाह दी थी.
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने इस दिशा में फोकस किया है. कृषि विभाग इसके लिए किसानों को जागरूक करेगा. पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू में सौ गांवों को क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया जायेगा.
बाद में इसे पूरे राज्य में लागू किया जायेगा. जलवायु परिवर्तन का ही असर है कि सुखाड़ के कारण किसानों को परेशानी हुई है. समय पर बारिश नहीं होने के कारण फसल चक्र में बदलाव हो रहा है. कभी काफी गर्मी तो कभी काफी ठंड हो जाती है.
इन्हीं सब को देखते हुए काफी समय से इस पर विचार हो रहा था कि मौसम से फसल चक्र में जो बदलाव हो रहा है उस पर कैसे काबू पाया जाये, ताकि खेती में किसानों को परेशानी नहीं हो. कृषि विभाग का यह प्रयास अब मूर्त रूप लेने लगा है.
पायलट प्रोजेक्ट के लिए राज्य में बने चार कॉरिडोर
इस प्रोजेक्ट के तहत सौ गांवों को क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के रूप में किया जायेगा विकसित
हर कॉरिडोर में 2500 किसान
पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राज्य में इसके लिए चार कॉरिडोर का चयन किया गया है. पहला कॉरिडोर भागलपुर से मुंगेर, दूसरा नालंदा से पटना, तीसरा पूर्णिया से कटिहार और चौथा समस्तीपुर से दरभंगा के बीच बना है. सभी कॉरिडोर में 25-25 गांव शामिल किये गये हैं.
वहीं, सभी गांवों से सौ-सौ किसानों का चयन किया गया है. सारे गांव सड़क के किनारे बसे हैं. हर कॉरिडोर में 2500 किसान हैं. इन गांवों को क्लाइमेट स्मार्ट विलेज का नाम दिया गया है. केंद्र सरकार भी इसमें सहयोग कर रही है.
किसानों को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसानों को जलवायु परिवर्तन में हो रहे बदलाव में कैसे खेती की जाये इसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा. छोटे किसानों के लिए मशीनीकरण के लिए कस्टम सेवा सुविधा का विकास किया जायेगा. इन गांवों में जीरो टिलेज, धान प्रबंधन, बीज और चारा बैंक आदि पर स्थानीय विशिष्टता पर शोध भी हो रहा है.
इन गांवों के किसानों को बिहार कृषि विवि, राजेंद्र कृषि विवि और भारतीय अनुसंधान संस्थान प्रशिक्षित करेंगे. अभी तत्काल चारों कॉरिडोर के लिए करीब सात करोड़ की राशि उपलब्ध करायी गयी है. हर कॉरिडोर को करीब पौने दो करोड़ रुपये मिलेंगे.
मौसम के अनुसार खेती का गुर बताया जायेगा
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा आरके सोहाने ने बताया कि क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती करने का गुर सिखाया जायेगा. किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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