राजदेव पांडेय
शहर में संतोषजनक हवा का लगातार गिर रहा स्तर, साल में औसतन 250 दिन मिल रही है खराब हवा
पटना : शहर की आबोहवा जहरीली हो चली है. धूल और धुएं और कचरे में पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों के चलते शहर की हवा तेजी से खराब होती जा रही है. हालात ये हैं कि साल में औसतन केवल 2 से 3 दिन ही अच्छी हवा मिल पाती है. कामचलाऊ या संतोषजनक हवा भी बमुश्किल से 100 दिन ही बहती है.
गजब की बात यह है कि साल के 365 दिनों में 250 से अधिक दिन शहर के लोग खराब या बहुत खराब हवा में ही सांस ले रहे हैं. समाप्त हो रहे वर्ष 2018 में भी शहर की आबोहवा लगातार खराब हो रही है. हवा की ये दयनीय दशा तब है, जब शहर में औद्योगिक बस्तियां सक्रिय हालात में नहीं हैं. बात साफ है कि शहर के लोगों के स्वास्थ्य पर जबरदस्त खतरा मंडरा रहा है.
प्रदूषण की दूसरी अहम वजह खुले में कंस्ट्रक्शन और बालू की अवैध डंपिंग
खुले में हो रहे कंस्ट्रक्शनों ने शहर में हवा को खास तौर पर खराब किया है. इसके अलावा शहर में अवैध तौर पर बालू के अवैध डंपिंग ग्राउंड भी सैकड़ों में हैं. यहां हजारों टन बालू डंप रहता है. शहर में सैकड़ों जगहों पर सड़कों पर इसे स्टोर किया जा रहा है. इसके चलते हवा में धूल के ठोस कणों की मात्रा कई गुना अधिक बढ़ जाती है.
प्रदूषण की सबसे अहम वजह रेंगते वाहनों का धुआं
सेंट्रल अर्बन ट्रांसपोर्ट की आधिकारिक एजेंसी ने हाल ही एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि देश में कोलकाता के बाद पटना में सबसे कम वाहनों की गति है.
कोलकाता शहर में करीब नौ किमी प्रति घंटे तो पटना में बारह किमी प्रति घंटे से वाहन चलते हैं. बात साफ है कि शहर की सड़कों पर वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं. जिसके चलते वाहनों का धुआं प्रदूषण की अहम वजह बन गया है.
इसके तहत जो वाहन चल भी रहे हैं, उनमें भी 75 फीसदी अनफिट हैं. इनसे हो रहे धुएं के उत्सर्जन ने शहर की आबोहवा को असंतुलित कर दिया है. फिलहाल शहर में नयी सड़कों के विस्तार का अनुपात सालाना एक फीसदी भी नहीं है. वहीं, वाहनों की संख्या में सालाना दस फीसदी का इजाफा हो रहा है. उदाहरण के लिए शहर में वर्ष 2017 में वाहनों की संख्या में एक लाख की बढ़ोतरी हुई. जबकि, वर्ष 2018 में वाहनों की संख्या में और वृद्धि होने का अनुमान है. कुल करीब तेरह लाख वाहन हैं.
बिहार में वाहनों की संख्या केविशेष आंकड़े
एक अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक शहर में आठ लाख वाहनों के रजिस्ट्रेशन हुए. इनमें करीब बारह से पंद्रह फीसदी अकेले पटना में दर्ज हुआ.
पटना विशेष में एक अप्रैल 2011 तक केवल 2़ 34 लाख वाहनों के पंजीयन हुए थे.शहर में 266 दिन हवा खराब रही : बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक स्रोतों के मुताबिक वर्ष 2017 में पटना शहर में 266 दिन हवा खराब रही. इन दिनों शहर की एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू मोडरेट (मध्यम दर्जे की हवा) से लेकर सीवियर (कष्टदायक) तक दर्ज हुई. साल 2017 में शहर की हवा 36 दिन कष्टदायक, 85 दिन बहुत खराब, 53 दिन खराब, 92 दिन मध्यम दर्जे की हवा, 77 दिन संतोषजनक और 2 दिन केवल अच्छी हवा मिल रही है.
सरकारी एजेंसियां पूरी तरह फेल रहीं
प्रदूषण के सबसे अहम कंटेंट पीएम 2़ 5 ही रहा है. वर्ष 2016 में इसकी औसत मात्रा 122 और वर्ष 2017 में भी औसतन इसकी मात्रा 116-120 के बीच रही, जो कि औसत से तीन से चार गुना अधिक है. सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2018 में इसकी औसत मात्रा 130-140 के बीच रहने का अनुमान है. पीएम 2़ 5 की मुख्य वजह शहर में उड़ने वाले धूल के ठोस कण, वाहनों के धुएं से उत्सर्जित रहने वाले रासायनिक तत्व आदि हैं. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि इन पर नियंत्रण पाने में सरकारी एजेंसियां बुरी तरह फेल रही हैं.
