पटना : आर्ट कॉलेज की घटना पर विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है. छात्र संघ चुनाव के बाद यूनिवर्सिटी को घेरने की तैयारी में हैं. आर्ट कॉलेज के छात्रों का पक्ष लेते हुए छात्र संगठन एआईएसएफ से सुशील कुमार छात्रों के साथ जाकर कॉलेज प्राचार्य से भी मुलाकात कर चुके हैं.
सुशील ने कहा कि इस संबंध में यूनिवर्सिटी को दुबारा विचार करना होगा. मांग की है कि एफआईआर वापस हो और रिजल्ट का प्रकाशन जल्द किया जाये. अगर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आंदोलन होगा. उन्होंने कहा कि बर्थडे मनाने पर छात्रों पर एफआईआर करना उनका कैरियर बर्बाद करने जैसा है. यह विश्वविद्यालय प्रशासन का तुगलकी फरमान है.
पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो एनके चौधरी ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है. प्रो एनके चौधरी ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय छात्र अनुशासन समिति ने एफआईआर का फैसला गलत दिया है. छात्र कोई अपराधी नहीं है.
पहली बार जब शिकायत गयी तो जुर्माना लगा कर छात्रों को बरी कर देना चाहिए था. लेकिन एफआईआर कहीं से सही नहीं है. इससे कैंपस का माहौल खराब होगा. वहीं, छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अंशुमान ने कहा कि इस संबंध में पीयू प्रशासन के बात की जायेगी. कैंपस में जन्मदिन मनाना कहां से गलत है.
इस बात की जानकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन दे. छात्रों को जान-बूझ कर फंसाया जा रहा है. अगर छात्रों पर से एफआईआर वापस नहीं ली गयी तो इस बात को लेकर आंदोलन होगा.
शिक्षक का बर्थडे मनाने पर छह छात्रों पर हुई थी एफआईआर
कला एवं शिल्प महाविद्यालय के क्लास रूम में 25 सितंबर को छह छात्रों ने शिक्षक की बर्थडे पार्टी मनायी थी जिस बात को लेकर विवाद हो गया. बर्थ डे सेलिब्रेशन ने छात्रों को कानूनी पेच से लेकर अनुशासनहीनता के कटघरे में खड़ा कर दिया.
छात्रों पर गैर जमानती धारा में एफआईआर दर्ज हो गयी. आरोपित छात्रों पर पीयू प्रशासन ने पांच-पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने के साथ ही फाइनल इयर के चार छात्रों के रिजल्ट पर भी रोक लगा दी है. दो अन्य स्टूडेंट्स छठे सेमेस्टर के हैं.
अगले सेमेस्टर में एडमिशन पर भी रोक लगायी : इन दो छात्रों को अगले सेमेस्टर में एडमिशन पर भी रोक लगायी है. वहीं फाइनल इयर के स्टूडेंट्स को अब यूनिवर्सिटी के किसी भी कोर्स में एडमिशन लेने से रोक भी लगा दी है. सभी आरोपित स्टूडेंट्स कला एवं शिल्प महाविद्यालय के मूर्तिकला विभाग के ही हैं. सूत्रों के मुताबिक यह पूरा मामला शिक्षकों के आपसी गुटबाजी का है और इसमें छात्र मोहरा बन गये हैं.
