दिनकर की पंक्तियों में थोड़ा फेरबदल कर रालोसपा प्रमुख ने किया ट्वीट
पटना : एनडीए के तीसरे घटक दल रालोसपा प्रमुख एवं मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा को ‘अंतिम’ पैगाम भेज दिया है.
इसमें सियासत, सीट और शेयरिंग शब्द भी नहीं है और सारी बात भी कह दी गयी है. भाजपा और जदयू तक अपनी बात पहुंचाने के लिए महाभारत काल के महान योद्धा कर्ण को समर्पित रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ के तीसरा सर्ग में दूत भगवान कृष्ण द्वारा पांडवों के लिए पांच गांव मांगने के प्रसंग पर उद्धृत पंक्तियों का सहारा लिया है.
दिनकर की पंक्तियों में
थोड़ा फेरबदल कर ट्वीट किया है, उपेंद्र लिखते हैं ‘‘आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को 2019 में फिर से प्रधानमंत्री बनाना चाहता हूं, लेकिन अपमान सहकर नहीं.” रालोसपा ने अंतिम पैगाम शीर्षक से ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए अपनी भावना व्यक्त की है- ‘… दो न्याय अगर तो, ज्यादा दो पर, इसमें यदि बाधा हो, तो दे दो केवल हमारा सम्मान, रखो अपनी धरती तमाम’.
पटना : कुशवाहा ने नीतीश से की गुहार, माफी नहीं मांगें तो शब्द ही वापस ले लें
पटना : रालोसपा प्रमुख सह केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाह दुखी हैं. उनका दुख कब दूर होगा यह उनको भी नहीं पता है. उनका कहना है कि नीतीश कुमार की बात से मुझे निजी रूप से तकलीफ पहुंची है. हमने उनसे माफी मांगने की बात नहीं कही है. मेरा उनसे इतना ही आग्रह है कि वे कम से कम अपने शब्द वापस ले लें. कुशवाहा ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नाउम्मीद हो चुके हैं. प्रधानमंत्री से वह न्याय की उम्मीद लगाये बैठे हैं.
आगे क्या होगा उनको नहीं मालूम है, लेकिन एक आस है. भाजपा रालोसपा को दो सीट देना चाह रही है, इस सवाल पर कहना था कि भाजपा जो देना चाह रही है वह अभी स्वीकार नहीं है. अब हम अमित शाह से मिलने का प्रयास नहीं करेंगे. बुलायेंगे तो ही जायेंगे. सोमवार को दिल्ली पहुंच जायेंगे. दो-तीन दिनों में प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे.
शायद वहां न्याय मिल जाये. वहां क्या बात होगी या नहीं होगी, इन सभी बातों की जानकारी चार-पांच दिसंबर को वाल्मीकिनगर में पार्टी के कार्यक्रम रखेंगे. पार्टीजन जो भी निर्णय लेंगे उस पर अमल होगा. वार्ता के दौरान उन्होंने महाभारत से जुड़ी दिनकर की कविता को जिसमें पांडव अपने सम्मान के लिए कौरवों से अनुरोध कर रहे हैं.
पैगाम-ए-खीर का आयोजन : इससे पूर्व बिहार की सियासत में पैगाम-ए-खीर को शामिल करने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को यादवों के दूध, कुशवाहों के चावल और सवर्णों की चीनी और दलितों-पिछड़ाें के तुलसी पत्ता और पचपनिया के पंच मेवा से तैयार खीर को अल्पसंख्यकों के दस्तरखान पर बैठकर खायी. रालोसपा महिला प्रकोष्ठ की प्रधान महासचिव मधु मंजरी द्वारा पैगाम-ए-खीर कार्यक्रम का आयोजन दीघा स्थित बांस कोठी में किया गया था. यहां सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि समाज में किसी को ऊंचा-नीचा व छोटा-बड़ा समझने की जरूरत नहीं है. पैगाम-ए-खीर का मकसद सामाजिक समरसता लाना है. कई लोगों ने पार्टी की सदस्यता भी ली.
