पटना : बिहार प्रदेश ईख कास्तकार संघ ने बुधवार को पेराई सत्र 2018-19 के लिए ईख मूल्य निर्धारण में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है. संघ ने उत्तम प्रभेद के गन्ने का मूल्य 610 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की है. इस संबंध में संघ के प्रदेश महासचिव नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे संदेश में लिखा है कि केंद्र सरकार द्वारा चालू सीजन के लिए पिछले साल की तुलना में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर 275 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी तय करना कहीं से भी न्यायोचित नहीं है. उल्लेखनीय है कि बीते सीजन में एफआरपी 255 रुपये तय किया गया था, जबकि राज्य में किसानों को विभिन्न प्रभेदों का क्रमशः 265 रुपये, 290 रुपये और 310 रुपये की कीमत मिली थी.
संदेश में लिखा है कि खाद, कीटनाशक, दवा, डीजल, ईख की रोपाई, छिलाई, कटाई, ढुलाई काफी महंगी हो गयी है.केन्द्र सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी की अनुशंसा के आलोक में खेती के लागत खर्च का डेढ़ गुना कीमत देने की घोषणा कर रखी है, पर एफआरपी के निर्धारण में इसकी अनदेखी है.
उन्होंने कहा है कि कई साल से ईख मूल्य की घोषणा बिहार सुगर मिल्स एसोसिएशन द्वारा की जाती है. यह अधिकार पहले बिहार केन बोर्ड के पास हुआ करता था. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किसान प्रतिनिधियों के साथ बोर्ड की बैठक हुआ करती थी और मिल मालिकों से विमर्श कर निर्धारित मूल्य की अधिसूचना ईखायुक्त जारी किया करते थे.
ईंख मूल्य की घोषणा मिल मालिकों द्वारा बिना ईंख कास्तकारों की सहमति से किए जाने का पुरजोर विरोध करते हुए इस नाजायज प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग मुख्यमंत्री से की गयी है. उन्होंने गन्ना किसानों का पिछला बकाया भुगतान भी सुनिश्चित कराने की मांग की है.
