पटना : पटना विश्वविद्यालय में जनवरी से प्लेगरिज्म (साहित्य चोरी) रहित थेसिस का सेल्फ सर्टिफाई सर्टिफिकेट रिसर्च छात्रों को थेसिस से पहले जमा करना होगा.
पीयू प्लेगरिज्म को रोकने के लिए जो नया सॉफ्टवेयर खरीदने जा रहा है वह जनवरी से काम करने लगेगा. अगर कोई छात्र अपनी थेसिस की जांच पूर्व में कराना चाहते हैं तो उसकी जांच के लिए उन्हें पांच सौ रुपये देना होगा और साथ ही सर्टिफिकेट भी देना होना. दोनों के बाद भी अगर उक्त थेसिस में प्लेगरिज्म पाया गया तो उसमें सख्त कार्रवाई विवि के द्वारा की जायेगी. ऐसा यूजीसी का भी निर्देश है.
8 दिसंबर को वर्कशॉप : प्लेगरिज्म को लेकर विवि के द्वारा एक वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया है. इसमें रिसर्च स्कॉलर व शिक्षक (सुपरवाइजर) सभी को शामिल होना है इसके नियम कानून सब उनको पता करना रखना है. ताकि किसी भी तरह की गलती नहीं हो. क्योंकि गलती होने पर कार्रवाई के तहत उक्त छात्र और शिक्षक दोनों को सजा मिल सकती है.
छात्र का पीएचडी या थेसिस तक कैंसिल हो सकता है. वहीं शिक्षक पर विभागीय कार्रवाई होगी. इस तरह की कार्रवाई पीयू के साहित्य चोरी को रोकने को लेकर पहल को लेकर की जा रही है. हालांकि ऐसा नहीं है कि कहीं से कोई साभार नहीं लिया जा सकता है लेकिन उसका जिक्र करना अनिवार्य होगा कि ये पंक्तियां किनकी हैं और कहां से ली गयी हैं. वर्कशॉप में इसी तरह की कई सारी चीजें विस्तार पूर्वक बतायी जायेंगी. कहां तक प्लेगरिज्म मान्य है और उसका स्तर कितना होने के बाद उसमें परेशानी है.
सभी के लिए लाभदायक
विवि के द्वारा जल्द ही प्लेगरिज्म को रोकने के लिए साफ्टवेयर खरीदी जायेगी. यह जनवरी से कार्यरत हो जायेगा. इसी से जुड़ी जानकारियों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है. यह छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए काफी लाभदायक होगा.
प्रो एनके झा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू
