पटना : पटना पुलिस लाइन उपद्रव मामले में सोमवार को एसआईटी गठित कर दी गयी. इस एसआईटी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी पटना जिले के एसएसपी मनु महाराज को सौंपी गयी है.
एसआईटी का गठन करने का उद्देश्य उपद्रव को लेकर हर तरह के मामलों की जांच करना है. उपद्रव में शामिल पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की जांच, फंसाने के आरोप की जांच, उपद्रव में शामिल अन्य की पहचान करना आदि मामले शामिल हैं.
इसके अलावा उपद्रव के कारणों की जांच करना भी एसआईटी के उद्देश्य में शामिल है. उपद्रव में नाम शामिल होने के कारण बर्खास्त कई पुलिसकर्मियों का यह भी कहना है कि वे लोग ड्यूटी पर थे और इसके बावजूद उन्हें भी उपद्रव में शामिल होना माना गया और बर्खास्त कर दिया गया. इसके अलावा उपद्रव में शामिल आरोपितों की संलिप्तता के साक्ष्य इकट्ठा करना और न्यायालय को अवगत करा कर वारंट लेने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है.
जांच के दायरे में डीएसपी मसेलउद्दीन की भूमिका
इसके साथ ही एसआईटी को डीएसपी मसेलउद्दीन की भूमिका की जांच और उन पर लगे आरोप की जांच करने का भी निर्देश दिया गया है. मसेलउद्दीन को फिलहाल पुलिस लाइन से हटा दिया गया है. उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया है. एसआईटी की जांच में मसेलउद्दीन के खिलाफ कोई साक्ष्य हाथ लगता है तो उन्हें भी निलंबित किया जा सकेगा.
डीआईजी के पास अपील कर सकते हैं ट्रेनी कांस्टेबल
बर्खास्त सिपाही डीआईजी के पास अपील कर सकते हैं. इसके बाद भी अगर बात नहीं बनी तो वे न्यायालय जा सकते हैं. इसके लिए बर्खास्त सिपाहियों ने वकीलों से भी संपर्क स्थापित किया है. सिपाहियों का इस मामले में केवल यह कहना था कि उन लोगों का पक्ष लिये बिना ही बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी गयी. इधर, पहचान होने के बाद 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को भी बुद्धा कॉलोनी थाने में दर्ज प्राथमिकी में अप्राथमिकी आरोपित बना दिया गया है.
