पटना : जिला समाहरणालय में होगा भूदान का कार्यालय

पटना : अब जिला समाहरणालय में भूदान का कार्यालय होगा. भूदान से संबंधित तमाम कार्यों में अब जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी कर दी गयी है. कार्यालय से संबंधित कर्मचारी सीधे जिलाधिकारी को रिपोर्ट करेंगे. इसलिए कार्यालय भी उसी परिसर में रखने का निर्णय लिया गया है. राजस्व पर्षद के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने यह […]

पटना : अब जिला समाहरणालय में भूदान का कार्यालय होगा. भूदान से संबंधित तमाम कार्यों में अब जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी कर दी गयी है. कार्यालय से संबंधित कर्मचारी सीधे जिलाधिकारी को रिपोर्ट करेंगे.
इसलिए कार्यालय भी उसी परिसर में रखने का निर्णय लिया गया है. राजस्व पर्षद के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि छह लाख 48 हजार एकड़ जमीन भूदान में मिली थी. इसमें से दो लाख 56 हजार एकड़ जमीन बांटी गयी. एक लाख 46 हजार 902 एकड़ जमीन असंपुष्ट है.
एक लाख नौ हजार 910 एकड़ जमीन का मामला अभी लंबित है. इसका लाभ तीन लाख 52 हजार 274 लोगों को मिला है. अब दान में दी गयी जमीन की जांच के लिए राज्य सरकार ने भूदान वितरण जांच आयोग का गठन कर दिया है. इसके अध्यक्ष पूर्व मुख्य सचिव अशोक चौधरी को बनाया गया है. आयोग और पर्षद की संयुक्त बैठक सोमवार को मुख्य सचिवालय में हुई.
भूदान वितरण जांच आयोग और राजस्व पर्षद की हुई बैठक
उधर, पत्रकारों से राजस्व पर्षद के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने कहा कि आयोग का कार्यकाल दो साल है, इस दौरान रूटीन का काम में व्यवधान नहीं पड़ेगा. संपुष्ट हो चुकी जमीन को बांटने की प्रक्रिया चलती रहेगी. कोशिश होगी कि भूदान एक्ट के तहत जो भी जमीन सामने आयेगी, उसका बंटवारा होता जाये. इस दौरान कुछ शिकायतें भी सामने आ रही हैं.
इन शिकायतों के निस्तारण के लिए राजस्व पर्षद के सचिव सुरेंद्र झा की अगुवाई में कमेटी बनायी गयी है. यह कमेटी एक माह के अंदर रिपोर्ट देगी. सूत्रों की मानें तो शिकायतों, जमीन बंटवारे आदि को लेकर आयोग अपने स्तर से समीक्षा करेगा और एक रिपोर्ट तैयार करेगा. आगे की कार्रवाई सरकार करेगी. बैठक में राजस्व पर्षद के संयुक्त सचिव मुकेश प्रसाद, राजस्व पर्षद सचिव सुरेंद्र झा, भूदान वितरण आयोग के सदस्य विनोद कुमार झा, राम विलास पासवान आदि मौजूद थे.
सोमवार को भूदान वितरण जांच आयोग के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि तीन लाख 46 हजार एकड़ जमीन संपुष्ट हुई. अब सवाल उठता है कि बाकी जमीन कहां है. किस स्थिति में है. जो संपुष्ट हुई और उसमें से जो जमीन वितरित की गयी, उनकी वस्तुस्थिति क्या है.
चौधरी ने माना कि काम आसान नहीं है. परंतु मुश्किल भी नहीं है. अगर इन सवालों के जवाब सरकार को मिल जाते हैं तो आगे की कार्रवाई करने में सरकार को आसानी होगी. दो साल का कार्यकाल आयोग का है, कोशिश होगी कि इस समयावधि में सरकार का काम पूरा कर दिया जाये.

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