पटना : शहर में अगस्त माह से रुक-रुक कर चल रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान फिलहाल थम चुका है. अंतिम दौर में पहुंचने तक यह अथियान पक्षपात की भेंट चढ़ गया. प्रभात खबर की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि शहर में कई ऐसी जगह हैं, जहां कार्रवाई के नाम पर प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियों ने मनमाना रवैया अपनाया है.
यह बात पूर्वी अशोक नगर के रोड नंबर-14 परिक्षेत्र की है, जहां प्रशासन की ओर से चार दिन पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गयी थी. इस दौरान प्रशासन ने देना बैंक मोड़ से बाइपास की ओर जाने वाले रास्ते पर जम कर मनमानी की है. अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक तरफ के घरों में कुछ के बाउंड्री को ही तोड़ा, तो कुछ के निर्माण को छोड़ दिया गया है. वहीं, सड़क की दूसरी तरफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
स्थानीय लोगों की मानें तो प्रशासन के अधिकारियों ने देना बैंक से बाईपास जाने के लिए दाहिने तरफ के मकानों की बाउंड्री तोड़ने का काम किया है. उसमें भी चुन-चुन कर लोगों पर कार्रवाई की गयी है. कुछ मकानों के बाउंड्री का तोड़ा गया है, जबकि उसी तरह के अतिक्रमण वाले मकानों को प्रशासन के अधिकारियों ने छोड़ दिया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन के लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर एक तरफ के निर्माण को तोड़ दिया. हम लोगों का नक्शा भी नहीं देखा गया. बिना किसी नापी के ही हमारे बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया गया.
16 अगस्त से चला था अभियान, दो करोड़ रुपये की वसूली : इधर जिला प्रशासन के सहयोग से नगर निगम बीते 16 अगस्त से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है. इसमें सबसे पहले 16 अगस्त से दस सितंबर तक, फिर 11 से 16 सितंबर तक, फिर 24 सितंबर से चार अक्टूबर तक और फिर 22 से 27 अक्टूबर तक अतिक्रमण चलाया गया है. गौरतलब है कि अभियान के शुरुआत में प्रशासन के आला अधिकारी सड़क पर उतर निरीक्षण करते थे, जो बाद में ठंडा पड़ गया. इतने दिनों के अभियान में जुर्माने के तौर पर दो करोड़ की वसूली की गयी.
