पटना : वोकेशनल कोर्स में शिक्षकों की सीट स्वीकृत नहीं, गेस्ट फेकल्टी से चलता है काम

पटना : पटना विश्वविद्यालय समेत राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स में शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हैं. इस वजह से पीयू में वोकेशनल कोर्स के लिए आज तक शिक्षकों की बहाली नहीं हुई. इस समस्या की वजह से कांट्रैक्चुअल बहाली भी नहीं निकाली जा सकी. गेस्ट फेकल्टी के सहारे कोर्स चल रहे हैं. […]

पटना : पटना विश्वविद्यालय समेत राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स में शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हैं. इस वजह से पीयू में वोकेशनल कोर्स के लिए आज तक शिक्षकों की बहाली नहीं हुई. इस समस्या की वजह से कांट्रैक्चुअल बहाली भी नहीं निकाली जा सकी.
गेस्ट फेकल्टी के सहारे कोर्स चल रहे हैं. विवि ने सीट सैंक्शन के लिए राजभवन व राज्य सरकार को भेजा है. विवि में कोर्स तो चल रहे हैं लेकिन नियमित शिक्षकों के नहीं होने से दिक्कतों का सामना छात्रों को करना पड़ता है. साथ ही शोध कार्य के लिए भी इन विषयों में शिक्षक मौजूद नहीं हैं.
वोकेशनल कोर्स का भार नहीं लेना चाहती राज्य सरकार
मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालयों को वोकेशनल कोर्स खोलने की अनुमति इसी शर्त पर दी गयी थी कि उक्त कोर्स का किसी भी तरह भार सरकार नहीं लेगी. यही वजह है कि वोकेशनल कोर्स की फीस सामान्य कोर्स की फीस से करीब सौ गुणा से भी ज्यादा है. सूत्रों की मानें तो चूंकि कॉलेज की फीस काफी कम है, इसलिए वोकेशनल कोर्स की राशि से ही कई कॉलेजों का कई तरह का खर्चा चल रहा है. विवि व कॉलेज के द्वारा वोकेशनल कोर्स खोलने का मकसद भी यही था कि उक्त कोर्स के बहाने कॉलेज की आय बढ़ायी जाये.
सरकार किसी भी तरह का अनुदान नहीं देती. अब अगर सीटें सैंक्शन होंगी तो उसकी सैलरी सरकार को ही देनी होगी. इस वजह से सरकार भी इसमें बहाली नहीं चाहती. दूसरा कि अगर सरकारी शिक्षक इसमें बहाल होंगे तो फिर इन कोर्स को भी रेगुलर कोर्स की तरह सरकारी रेट (शुल्क) से चलाना होगा. इन्हीं तकनीकी वजहों से सीट सैंक्शन नहीं हो पा रहे. जबकि दूसरे कई विश्वविद्यालयों में इन वोकेशनल कोर्स में भी शिक्षकों की बहाली होती है. उक्त शिक्षकों की सैलरी सरकार देती है. कई जगह उक्त कोर्स रेगुलर कोर्स की तरह ही चलते भी हैं. उक्त कोर्स में शोध कार्य भी हो रहे हैं.
वोकेशनल कोर्स में सीटें स्वीकृत नहीं हैं. यही वजह है कि हम कांट्रैक्ट पर भी इसकी बहाली नहीं कर रहे हैं. इसके लिए राजभवन से दिशा निर्देश मांगे गये हैं. वहीं सरकार से भी सीटें स्वीकृत करने को लेकर पत्राचार चल रहा है. नियमित बहाली के लिए भी सीटों का होना अति आवश्यक है.
– प्रो एनके झा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू
सिर्फ आय का साधन बनकर रह गया है वोकेशनल कोर्स
पटना विश्वविद्यालय समेत तमाम विश्वविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स सिर्फ आय का साधन मात्र हैं. अगर सुविधाओं की बात की जाये तो शिक्षक तो नहीं ही हैं, साथ ही सुविधाओं के मामले में इतने पैसे देने के बाद छात्रों के लिए न तो कोई अलग भवन है न ही क्लास रूम तक अपना है.
दूसरे विभागों पर निर्भर होकर दशकों से यह कोर्स चल रहे हैं. उन विभागों की दया हुई तो क्लास रूम मिला नहीं तो दो शिफ्ट में कोर्स चलाने पड़ते हैं. कई बार क्लास रूम को लेकर दंगल होता रहता है. इसके अतिरिक्त लैब के नाम पर कुछ भी नहीं है. विशेष लाइब्रेरी के नाम पर एक दो अलमारी पुस्तकें मिल जाया करती हैं. कई जगहों पर लंबे समय से किताबें अपग्रेड नहीं की गयी हैं. इसी तरह की कई तरह की समस्याओं से वोकेशनल कोर्स के छात्र जूझते रहते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >