पटना : भारत में करीब तीन करोड़ बांग्लादेशी हैं जो अवैध धंधों में संलिप्त हैं. दिन पर दिन इनकी संख्या बढ़ रही है. इनसे देश की सुरक्षा को भी खतरा पैदा होने लगा है. इनके कारण किसी क्षेत्र विशेष के लोगों को अपने ही देश में अल्पसंख्यक होने का अंदेशा बढ़ता जा रहा है. भारत ने 16 देशों के करीब 45 लाख शरणार्थियों को शरण दे रखा है और सभी शांति से रह रहे हैं. दुनिया में दूसरा कोई अन्य ऐसा देश नहीं होगा, फिर भी कुछ लोगों का यहां दम घुटता है और यहां असहिष्णुता दिखती है.
ऐसा करने वाले लोग एंटी सेक्युलर, एंटी नेशनल व एंटी डेमोक्रेट हैं. यह बातें आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (एफएएनएस) के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहीं. वे सोमवार को ‘जन सांख्यिकी परिवर्तन: राष्ट्र के समक्ष एक चुनौती’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में किया गया.
केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने कहा डेमोग्राफिक परिवर्तन आया
संगोष्ठी में केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र (प्रभार) आरके सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में मूल निवासियों के मुकाबले घुसपैठियों के कारण डेमोग्राफिक परिवर्तन आया है. अंग्रेजों का फॉरनर एक्ट-1946 को 1981 में बदल दिया गया, जिससे घुसपैठियों को भारत में बसने में आसानी हो गयी. फि अपने वोट बैंक के खातिर उस समय के नेताओं ने राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता कर लिया.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बोले
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि हमारी मूल विरासत को कमजोर कर बहुसंख्यक को कम करने का प्रयास चल रहा है. इसे कभी सफल नहीं होने दिया जायेगा. डेमोग्राफिक में ज्यादा असंतुलन हुआ तो हम कानून बनाने लायक भी नहीं रहेंगे. संगोष्ठी में केरल हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूपी सिंह और एफएएनएस के बिहार मंत्री गोलोक बिहारी राय ने भी संबोधित किया.
