पटना : गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में निर्माण सामग्री पर चुकाये टैक्स के बदले इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) देने का प्रावधान है. यह इनपुट टैक्स क्रेडिट जीएसटी के तहत जमीन की लागत के बदले दी गयी छह फीसदी की रियायत से अलग है, जिसका फायदा बिल्डरों को ग्राहकों को देना है. लेकिन, कई बिल्डर इस रियायत को ही इनपुट टैक्स क्रेडिट बता कर ग्राहकों को भ्रमित कर रहे हैं.
नेशनल एंटीप्रोफिटिंग अथॉरिटी (एनएए) के ताजा फैसले के बाद बिहार रियल इस्टेट रेगुलेशन अथॉरिटी (रेरा) इसको लेकर सख्त हुआ है. जल्द ही ऐसी शिकायतों की सुनवाई कर ठगी करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई की जायेगी.
निर्माण लागत कटौती के बाद लगता है जीएसटी : निर्माण लागत कटौती के बाद ही बिल्डर को जीएसटी अदा करनी होती है. उदाहरण के तौर पर किसी फ्लैट की कीमत 4000 रुपये/वर्ग फीट है, तो इसमें फ्लैट की निर्माण लागत 1600 रुपये होगी. बिल्डर को इसका ही इनपुट क्रेडिट मिलेगा, जिसे ग्राहक को देना है. फ्लैट की कीमत के शेष बचे हिस्से 2,400 रुपये पर 12 फीसदी जीएसटी यानी 288 रुपये प्रति वर्ग फीट का टैक्स लगेगा.
एक अनुमान के मुताबिक पांच हजार रुपये वर्ग फीट के हिसाब से एक हजार वर्गफीट के फ्लैट की कीमत कीमत 50 लाख रुपये होगी. इस पर औसतन छह फीसदी यानी तीन लाख रुपये का इनपुट क्रेडिट मिलेगा, जो बिल्डर आपको देगा. वहीं, कुल जीएसटी छह लाख रुपये होगा. यानी इनपुट क्रेडिट माइनस करने के बाद 50 लाख के फ्लैट पर तीन लाख रुपये टैक्स देना होगा.
एनएए ने दिया है यह फैसला
नेशनल एंटी प्रोफिटिंग अथॉरिटी ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसले में गुड़गांव की पिरामिड इंफ्राटेक को 2476 फ्लैट मालिकों को ग्राहकों से जीएसटी मद में ली गयी 8.22 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि 18 फीसदी ब्याज के साथ तीन माह में लौटाने का आदेश दिया है. बिल्डर को कहा गया है कि वे या तो राशि वापस करें या ग्राहक की अंतिम किस्त की राशि में इसका समायोजन करें.
हरियाणा के टैक्स कमिश्नर को इसकी मॉनिटरिंग करते हुए चार महीने में कंपलायंस रिपोर्ट भी मांगी गयी है. इस संबंध में 109 फ्लैट खरीदारों ने एनएए में केस दाखिल कर आरोप लगाया था कि बिल्डर उनको इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं दे रहे.
