आपदा जोखिम न्यूनीकरण को 15 सालों का रोडमैप तैयार
पटना : राज्य सरकार ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर 15 वर्षों का रोडमैप तैयार किया है. इसको ‘बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप-2015-2030’ नाम दिया गया है. राज्य सरकार ने सेंडई (जापान) में आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर आयोजित विश्व सम्मेलन में तय किये गये वैश्विक लक्ष्यों को देखते हुए पूरी योजना बनायी है. खास बात यह है कि इसके महत्वपूर्ण बिंदु सुरक्षित शहर का सीधा संबंध शहरी निकायों एवं उनके प्रतिनिधियों से है.
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से बुधवार को बामेती में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी निकायों के प्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक संवेदित हों एवं उनमें आवश्यक कौशल एवं क्षमता का विकास हो सके आदि था. प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी ने कहा कि बुधवार को कोकराझार क्षेत्र में भूकंप आया. इसका प्रभाव मुंगेर तक था. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा तो आती है, साथ ही मानवजनित आपदा से ज्यादा क्षति होती है.
‘रोडमैप को अमल में लाना जरूरी’
सदस्य डॉ उदय कांत मिश्र ने कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद मुसीबतों का मुकाबला किया जाता है. इंसीडेंट रेस्पांस सिस्टम के तौर पर सभी को काम करना होगा. सदस्य पीएन राय ने कहा कि बिहार में शहरी क्षेत्र अभी कम है. आगे इसमें बढ़ोतरी होगी. डॉ मुहम्मद अहमद ने कहा कि रोडमैप को अमल में लाना आवश्यक है. आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव एम रामचंदटुडु ने कहा कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में तय नियमों के तहत ही काम करना जरूरी है.
