पटना: कैबिनेट विस्तार के बाद जदयू में विरोध के सुर थमने का नाम नहीं ले रहा है. विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू के बाद अब विधान पार्षद नीरज कुमार, संजय सिंह, विधायक राजू कुमार सिंह व अजीत कुमार ने मोरचा खोल दिया है.
विधान पार्षद संजय सिंह और नीरज कुमार ने पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है, जबकि विधायक अजीत कुमार ने पार्टी की राज्य कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया है. तीनों नेताओं ने अपना इस्तीफा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को सौंपा. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि संजय सिंह ने पत्र के जरिये अपना इस्तीफा भेजा है. वह किसी असंतोष की बात कही है, लेकिन किसी खास मंसूबा के कारण ही इस्तीफा दिया है.
बुधवार को पटना पहुंचने के बाद नीरज कुमार ने पार्टी के कई नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि पार्टी को खड़ा करने जिन लोगों ने तपस्या की है और जंगल राज को खत्म किया, वैसे कार्यकर्ताओं को मंत्रिमंडल के विस्तार में दूसरे दलों से आये नेताओं को शामिल करने से ठेस पहुंची है. पहले दूसरे दलों के नेताओं को तोड़ कर पार्टी में शामिल करो, फिर उन्हें विधान पार्षद बनाओ और फिर उन्हें मंत्री बना दो. जदयू में शामिल हुए अवनीश कुमार सिंह, विजय मिश्र और राणा गंगेश्वर का क्या अपराध था, जो उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया. सिर्फ एक खास दल से पार्टी छोड़ कर आये नेताओं को मंत्री बनाया गया. ललन सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने के सवाल पर नीरज कुमार ने कहा कि जब जनता ने ही जिसे हरा दिया, उसके बारे में हम क्या कहें. वह पार्टी में रहते हुए संगठन और पार्टी नेताओं का विरोध करते थे. वह तो अपनी पार्टी नेता के भी नहीं हुए. बावजूद इसके उन्हें बुला कर पहले टिकट दिया गया और जब चुनाव हार गये, तो विधान पार्षद मनोनीत कर मंत्री बना दिया गया. ऐसा करने से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान हुआ है.
मंत्रिमंडल का विस्तार चौकाने वाला : अजीत कुमार
पार्टी की राज्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देनेवाले कांटी के जदयू विधायक अजीत कुमार ने कहा कि कैबिनेट का जो विस्तार हुआ, वह चौकानेवाला है. कल तक जो नेता पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मैदान में थे, दल को ही उखाड़ फेंकने की बात करते थे, उन्हें पहले पार्टी में शामिल कर और फिर मंत्री पद दे दल विरोधी काम किया गया है. इससे पार्टी के समर्पित नेता-कार्यकर्ता आहत हैं. इस मामले पर अजीत कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फोन पर और व्यक्तिगत रूप से मिल कर नाराजगी जतायी. उन्होंने नीतीश कुमार से मांग की है कि पार्टीहित में वह कोई बड़ा फैसला लें, नहीं तो पार्टी को नुकसान होगा और असंतुष्टों की तादाद बढ़ती जायेगी. पार्टी के कई विधायक व नेता दुखी हैं.
सम्मान की करते हैं राजनीति : राजू सिंह
साहेबगंज के जदयू विधायक राजू कुमार सिंह ने कहा कि अंतिम सत्र के दौरान जो विधायक विरोधी पक्ष में बैठते थे और जिनका हम विरोध कर रहे हैं, वे अब मंत्री बन गये हैं. अब हम उनके पास किसी काम को लेकर कैसे जा सकते हैं? अगर पार्टी के दूसरे नेता, जो सम्मान की राजनीति करते हैं, वे वैसे मंत्रियों के पास नहीं जा सकते हैं. कैबिनेट विस्तार में पार्टी के इस फैसले के मेरे अलावा करीब 35 विधायक भी खिलाफ हैं, लेकिन ऐसा नहीं मैं उनका नेतृत्व कर रहा हूं. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था. उसी प्रकार उनके कार्यकाल में उनके साथ काम करनेवाले मंत्रिमंडल को भी इस्तीफा दे देना चाहिए और नीतीश कुमार की तरह पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए.
