जांच समिति के निर्देशों के बाद चार वर्षों से एप्रोच फनल में आने वाले चिड़ियाघर के वृक्षों की ऊंचाई कर दी सीमित
पटना : 30-40 वर्ष पहले तक पूरे पटना में हरियाली दिखाई देती थी, अब यह केवल जू और पार्कों में सिमट कर रह गयी है. इसमें भी बड़े वृक्ष केवल पटना जू में ही दिखते हैं, लेकिन पटना जू की हरियाली के लिए भी बगल में स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुसीबत बना रहा है. यहां उतरने वाले विमानों के एप्रोच फनल में आने के कारण कभी जू के पेड़ों को काटना तो कभी छांटना पड़ रहा है. तीन-चार वर्ष पहले ऐसी ही एक बड़ी कार्रवाई की गयी थी और अब एक बार फिर से एप्रोच लाइट विस्तार के नाम पर पेड़ों को छांटने की कवायद शुरू होने वाली है.
शहर के आधे से अधिक पौधे पटना जू में पूरे पटना में इस समय लगभग 20,000 पेड़ हैं, जिनमें आधे से अधिक पटना जू में स्थित हैं. 20 लाख की आबादी वाले शहर की जरूरत को देखते हुए ये बहुत कम हैं और वर्तमान पेड़ों की संख्या भी दिन प्रतिदिन घटती जा रही है.
कुर्जी और दीघा जैसे शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां 10-15 वर्ष पहले तक बड़े-बड़े बगीचे थे, उनकी संख्या अब घट कर केवल तीन रह गई है. नये-नये क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियों के विस्तार के कारण शहर के बाहरी क्षेत्राें में भी वृक्षों की संख्या दिन-ब-दिन कम होते जा रही है. पटना जू ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां के वृक्षों को सरकार प्रयास कर बचा सकती है. ऐसे में पटना जू के वृक्षों की कटाई गंभीर चिंता पैदा करती है.
चार लेयरों में होती है छंटाई : 2000 में एलायंस एयर के विमान दुर्घटना के बाद गठित जांच समिति के निर्देशों के अनुरूप चार वर्षों से एप्रोच फनल में आने वाले चिड़ियाघर के वृक्षों की ऊंचाई सीमित कर दी गयी है.
विमान को बाधा का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए एप्रोच फनल में आने वाले वृक्षों को चार श्रेणियों में बांटा गया है. विमान के ग्लाइडिंग ऐंगल, रनवे से दूरी और जमीन से ऊंचाई के आधार पर हर श्रेणी में वृक्षों की अधिकतम ऊंचाई निर्धारित की गयी है, जो जू के गेट संंख्या 2 से रनवे की तरफ क्रमश: घटती जाती है. मेंटेन करने के लिए नियमित छंटाई होती है, जिससे 1500 पेड़ों की ऊंचाई एक सीमा से अधिक नहीं बढ़ पा रही है.
एप्रोच लाइट के कारण होगी 510 मीटर तक छंटाई
पटना एयरपोर्ट पर रनवे के किनारे वर्तमान में 210 मीटर एप्रोच लाइट लगी है. पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में इसे बढ़ाकर 720 मीटर करने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ताकि आईएलएस कैट वन सिस्टम को इंस्टॉल किया जा सके. लेकिन इसके लिए पीर अली पथ और जू में पिछले वर्ष लगाये गये 210 मीटर एप्रोच लाइट का इस्तेमाल शुरू करने के साथ-साथ 300 मीटर नये एप्रोच लाइट का भी निर्माण करना होगा.
पूर्व निर्मित एप्रोच लाइट का इस्तेमाल शुरू करने के लिए उसके आसपास के बड़े पेड़ों को छांट कर छोटा करना होगा ताकि उनके कारण लाइट की दृश्यता प्रभावित नहीं हो. साथ ही, नये एप्रोच लाइट बनाने के दौरान भी बड़ी संख्या में पेड़ों को छांटना या काटना पड़ेगा.
